BJP Karnataka Protest : कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के मंत्री बी. नागेंद्र को लेकर सियासी विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। उनके इस्तीफे की मांग को लेकर बीजेपी और जेडीएस ने सोमवार को विधानसभा का घेराव करने की कोशिश की। विपक्षी दलों का आरोप है कि नागेंद्र का नाम कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले में सामने आया था। इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी और जेडीएस के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।
पुलिस ने विपक्षी नेताओं को लिया प्रिवेंटिव कस्टडी में
विधानसभा घेराव के लिए प्रदर्शनकारी फ्रीडम पार्क से मार्च करते हुए विधान सौधा की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के कारण पुलिस ने कार्रवाई की। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक, बीजेपी नेता सी.टी. रवि, प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र समेत बीजेपी और जेडीएस के कई नेताओं और समर्थकों को पुलिस ने प्रिवेंटिव कस्टडी में ले लिया। इसके बाद प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई।
सीटी रवि ने लगाए गंभीर आरोप
हिरासत में लिए जाने से पहले बीजेपी नेता सी.टी. रवि ने बी. नागेंद्र पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के फंड में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है। सीटी रवि ने दावा किया कि इस मामले में नागेंद्र को पहले गिरफ्तार भी किया जा चुका है। बीजेपी का कहना है कि ऐसे विवादों के बीच उन्हें मंत्रिमंडल में बने रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
विधानसभा की कार्यवाही को लेकर भी टकराव
बीजेपी और जेडीएस के विधायक विधानसभा के भीतर भी बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से हटाने की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई नहीं कर रही है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने दावा किया कि करीब 89 करोड़ रुपये के वाल्मीकि निगम घोटाले में कथित भूमिका को देखते हुए नागेंद्र को तत्काल मंत्री पद से हटाया जाना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर सदन की कार्यवाही भी प्रभावित होने की बात सामने आई है।
एक सप्ताह से विरोध प्रदर्शन कर रही बीजेपी
बीजेपी कार्यकर्ता पिछले करीब एक सप्ताह से वाल्मीकि निगम मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पार्टी ने सोमवार को प्रदर्शन को आगे बढ़ाते हुए फ्रीडम पार्क से विधान सौधा तक मार्च निकालने की कोशिश की। पार्टी नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना और कथित घोटाले में जवाबदेही तय कराना है। जेडीएस ने भी इस मुद्दे पर बीजेपी के साथ सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई है।
आत्महत्या के बाद सामने आया था मामला
वाल्मीकि निगम से जुड़ा विवाद मई-जून 2024 में सामने आया था। निगम के अकाउंट सुपरिटेंडेंट पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी। बताया गया कि उन्होंने एक सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और निगम के खातों से बड़ी रकम के संदिग्ध ट्रांसफर की जानकारी सामने आई।
89 करोड़ के ट्रांसफर से शुरू हुई जांच
जांच के दौरान सामने आया कि यूनियन बैंक में निगम के खाते से करीब 89 करोड़ रुपये कथित रूप से अलग-अलग खातों में अवैध तरीके से ट्रांसफर किए गए थे। बाद की जांच में कुल मिलाकर लगभग 187 करोड़ रुपये के फंड में कथित हेरफेर की बात सामने आई। मामले ने कर्नाटक की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था और विपक्ष ने तत्कालीन मंत्री बी. नागेंद्र की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
इस्तीफा देने के बाद फिर मंत्रिमंडल में लौटे नागेंद्र
विवाद बढ़ने और केंद्रीय एजेंसियों की जांच के बीच तत्कालीन अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र ने 6 जून 2024 को सिद्धारमैया मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, बाद में राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं। 3 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कैबिनेट विस्तार के दौरान नागेंद्र को दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और उन्हें योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी दी गई।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
नागेंद्र की दोबारा कैबिनेट में वापसी के बाद बीजेपी और जेडीएस ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि इतने गंभीर वित्तीय विवाद के बावजूद उन्हें दोबारा मंत्री बनाया जाना कई सवाल खड़े करता है। वहीं, अब विधानसभा घेराव और नेताओं की हिरासत के बाद कर्नाटक में यह मुद्दा और गरमाता दिख रहा है। आने वाले दिनों में सदन के भीतर और बाहर इस मामले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं।
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