CTI Letter to PM Modi : दिल्ली में लगातार हो रहे धरने-प्रदर्शनों, ट्रैफिक जाम और सुरक्षा कारणों से मेट्रो सेवाओं में आ रही बाधाओं का असर अब व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ने लगा है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दावा किया है कि पिछले तीन दिनों में राजधानी के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही में भारी गिरावट दर्ज की गई है। संगठन के मुताबिक, कई बाजारों में कारोबार घटकर सामान्य स्तर के करीब 30 प्रतिशत तक रह गया है। इस स्थिति को देखते हुए CTI ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर त्योहारों के दौरान प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में बड़े धरने-प्रदर्शनों को नियंत्रित करने की मांग की है।
नवरात्रि से दिवाली तक बाजारों को राहत देने की मांग
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्रि उत्सव से लेकर दिवाली तक दिल्ली के प्रमुख बाजारों और सरकारी क्षेत्रों में बड़े प्रदर्शनों पर रोक लगाने या उन्हें नियंत्रित करने के उपाय किए जाएं। उनका कहना है कि नवरात्रि, रामलीला और दिवाली का समय व्यापारियों के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी सीजन होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग कपड़े, आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान और अन्य त्योहार संबंधी वस्तुओं की खरीदारी के लिए दिल्ली आते हैं। ऐसे में यातायात बाधित होने से ग्राहकों की संख्या और बिक्री दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही 70 प्रतिशत तक घटने का दावा
CTI के महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा के अनुसार, संगठन के सर्वे में पिछले तीन दिनों के दौरान दिल्ली के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही 70 प्रतिशत तक कम होने की बात सामने आई है। संगठन का दावा है कि इसका सीधा असर दुकानदारों और व्यापारियों की बिक्री पर पड़ रहा है। CTI के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के बाहर से रोजाना खरीदारी के लिए आने वाले लगभग दो से तीन लाख लोगों की संख्या घटकर करीब 40 हजार से 50 हजार रह गई है। हालांकि, ये आंकड़े संगठन की ओर से जारी किए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
दिल्ली के 15 लाख व्यापारियों के सामने नुकसान की आशंका
बृजेश गोयल के मुताबिक, दिल्ली में करीब 15 लाख व्यापारियों के लिए त्योहारों का मौसम आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। कई कारोबारी इस अवधि में होने वाली बिक्री पर निर्भर रहते हैं। यदि इसी दौरान प्रमुख बाजारों के आसपास लगातार प्रदर्शन, सड़क बंद होने और मेट्रो सेवाओं में रुकावट जैसी स्थितियां बनी रहती हैं, तो व्यापारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता है। CTI का कहना है कि वह शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करता है, लेकिन ऐसे आयोजनों की व्यवस्था इस तरह होनी चाहिए कि आम नागरिकों की आवाजाही, सार्वजनिक परिवहन और कारोबारी गतिविधियां अनावश्यक रूप से प्रभावित न हों।
जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और लुटियंस दिल्ली पर असर
CTI ने जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और लुटियंस दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में होने वाले प्रदर्शनों तथा यातायात प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई है। संगठन के अनुसार, इन इलाकों में सड़कें बंद होने या मार्ग बदलने से ग्राहकों को बाजारों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने की स्थिति में भी खरीदारी के लिए आने वाले लोगों की संख्या प्रभावित हो सकती है। दिल्ली के आसपास के शहरों से आने वाले ग्राहक ऐसी परिस्थितियों में यात्रा टाल सकते हैं, जिससे स्थानीय दुकानों और कारोबारियों की बिक्री पर दबाव बढ़ता है।
एक हजार से अधिक लोगों के प्रदर्शन से पहले आकलन की मांग
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में CTI ने मांग की है कि जंतर-मंतर और दिल्ली के प्रमुख सरकारी तथा व्यावसायिक क्षेत्रों में एक हजार से अधिक लोगों के प्रदर्शन की अनुमति देने से पहले उसके संभावित प्रभाव का आकलन किया जाए। संगठन चाहता है कि सुरक्षा, यातायात प्रबंधन, मेट्रो संचालन और व्यापार पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाए। फिलहाल यह CTI की मांग है; इस पर केंद्र सरकार की ओर से किसी निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है। अब व्यापारियों की नजर इस बात पर है कि त्योहारों से पहले उनकी समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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