Chhattisgarh Weather Alert : छत्तीसगढ़ में चक्रवात मुरासु के प्रभाव से मौसम का मिजाज बदल गया है। बंगाल की खाड़ी से उठा यह तूफान दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट तक पहुंचने के बाद कमजोर पड़ने लगा है, लेकिन इसके प्रभाव से कई राज्यों में बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने बुधवार, 4 नवंबर को छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। प्रदेश के लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
रायपुर और दुर्ग समेत 15 जिलों में बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, प्रदेश के रायपुर, दुर्ग सहित करीब 15 जिलों में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा बस्तर संभाग के छह जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन इलाकों में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की आशंका है। मौसम खराब रहने के दौरान बिजली गिरने और आंधी चलने का खतरा भी बना रहेगा।

60 किलोमीटर प्रति घंटे तक चल सकती हैं हवाएं
बारिश के साथ प्रदेश के कुछ इलाकों में तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, हवाओं की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ऐसे में खुले स्थानों, पेड़ों और कमजोर संरचनाओं के आसपास सावधानी बरतने की जरूरत है। आकाशीय बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में रुकने से बचना चाहिए। किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी मौसम की चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी रहा तूफान का असर
चक्रवात मुरासु का सबसे ज्यादा प्रभाव दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में देखने को मिला। आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों और तेलंगाना में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई थी। तूफान के दौरान तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जलभराव तथा बाढ़ जैसी परिस्थितियों का खतरा पैदा हुआ। अब तूफान कमजोर होने के बावजूद इसके अवशेषों से बारिश जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
ओडिशा और आसपास के राज्यों में भी बारिश की संभावना
ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भी मुरासु के प्रभाव से बारिश का अनुमान जताया गया था। इसके अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार के कुछ इलाकों में भी मौसम बदलने की संभावना बताई गई। तमिलनाडु और केरल के कुछ क्षेत्रों में भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में बारिश की तीव्रता और चेतावनी की अवधि मौसम प्रणाली की स्थिति के अनुसार बदल सकती है।

क्या है चक्रवात मुरासु नाम का अर्थ?
मुरासु चक्रवात का नाम भारत की ओर से दिया गया है। इस शब्द का अर्थ युद्ध के दौरान बजाया जाने वाला नगाड़ा या ढोल बताया जाता है। तूफान के सक्रिय रहने के दौरान इसकी हवा की अधिकतम रफ्तार 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान था। हालांकि, यह तूफान की चरम स्थिति से जुड़ी रफ्तार थी, छत्तीसगढ़ में अनुमानित हवा की गति इससे अलग है।
4 नवंबर को कमजोर हुआ चक्रवात, फिर भी सतर्कता जरूरी
भारत मौसम विज्ञान विभाग के बुलेटिन के अनुसार, 3 नवंबर की रात तक मुरासु कमजोर होकर गहरे दबाव के क्षेत्र में बदल गया था। 4 नवंबर की सुबह भी इसके अवशेषों के रूप में मौसम प्रणाली सक्रिय थी। ऐसे में छत्तीसगढ़ में बारिश और तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए लोगों को मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों का पालन करना चाहिए। खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचना और बिजली गिरने के समय सुरक्षित स्थान पर रहना जरूरी है।
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