Datia Protest: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव ने बीजेपी के भीतर एक बड़ी आंतरिक कलह को जन्म दे दिया है। टिकट वितरण की घोषणा होते ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार न बनाए जाने से उनके समर्थकों का आक्रोश सड़क पर उतर आया है। पार्टी ने दतिया से आशुतोष तिवारी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है, जिसके बाद से ही समर्थकों में भारी नाराजगी है। विरोध का आलम यह है कि कार्यकर्ता नरोत्तम मिश्रा को ही उम्मीदवार बनाने की मांग कर रहे हैं। इस सियासी दबाव को देखते हुए नरोत्तम मिश्रा स्वयं दिल्ली पहुंच गए हैं और माना जा रहा है कि वे आज केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर अपनी दावेदारी और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को सामने रखेंगे।

चक्का जाम और पथराव से दतिया में बिगड़े हालात
विरोध प्रदर्शन का यह सिलसिला शुक्रवार को तब शुरू हुआ जब पार्टी ने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी की। गुस्से में आए समर्थकों ने शहर की दुकानें बंद करवा दीं और बीजेपी कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि नेशनल हाईवे-44 पर समर्थकों ने करीब 10 से 11 घंटे तक चक्का जाम कर दिया। इस जाम के कारण करीब 50 किलोमीटर लंबी गाड़ियों की कतार लग गई और हजारों यात्री फंस गए। पुलिस के समझाने-बुझाने के बावजूद भीड़ बेकाबू रही। हालात तब और बिगड़े जब समर्थकों ने पुलिस बल पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके जवाब में प्रशासन को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

एसपी और पुलिस जवानों सहित कई लोग घायल
दतिया के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के अनुसार, लगभग 3,000 उपद्रवियों ने शहर की शांति व्यवस्था को भंग करने का प्रयास किया। एसपी ने बताया कि चक्का जाम के दौरान उपद्रवियों ने पुलिस पर अचानक सुबह के समय पथराव किया। इस हिंसक झड़प में पुलिस के 6 से अधिक जवान गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। एसपी और एडिशनल एसपी को भी चोटें आईं हैं। पुलिस ने साफ कर दिया है कि चक्का जाम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कुछ उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया है और पूरे जिले में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। इस बीच, विरोध प्रदर्शन के दौरान एक समर्थक द्वारा आत्मदाह का प्रयास करने की भी खबर है, जिसे पुलिस की तत्परता से समय रहते बचा लिया गया।
नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक कद और चुनावी समीकरण
डॉ. नरोत्तम मिश्रा बीजेपी के सबसे कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। वे 2018 से 2023 तक दतिया से विधायक रहे और शिवराज सिंह चौहान सरकार में गृह मंत्री के रूप में एक प्रभावशाली चेहरा थे। हालांकि, 2023 के विधानसभा चुनावों में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। वर्तमान में यह उपचुनाव तब अनिवार्य हो गया जब राजेंद्र भारती को 28 साल पुराने बैंक धोखाधड़ी के मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई और उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई। नरोत्तम मिश्रा अपनी हार के बाद से ही क्षेत्र में लगातार सक्रिय थे और उन्होंने चुनावी तैयारी भी शुरू कर दी थी, जिसके कारण उन्हें टिकट मिलने की प्रबल संभावना थी।
दिल्ली का इंटरनल सर्वे और टिकट कटने की असली वजह
सूत्रों के अनुसार, नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारक पार्टी का एक ‘इंटरनल सर्वे’ बताया जा रहा है। दिल्ली से आए इस सर्वे में मिश्रा की जीत की संभावनाओं को कमजोर आंका गया था। पार्टी हाईकमान ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से इस पर फीडबैक मांगा था, जहां से संकेत मिले कि मिश्रा के लिए चुनाव लड़ना कठिन हो सकता है। इसी आधार पर शीर्ष नेतृत्व ने किसी नए चेहरे पर दांव लगाने का फैसला किया। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के बीच कई दौर की बैठकों के बाद अंततः आशुतोष तिवारी के नाम पर मुहर लगाई गई, जो शायद समर्थकों को स्वीकार्य नहीं है।
भविष्य की राजनीति और पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस विरोध का प्रभाव पार्टी की आगामी बैठकों पर भी पड़ता दिख रहा है। ओरछा में 18-19 जुलाई को प्रस्तावित बीजेपी की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को स्थगित कर दिया गया है। आधिकारिक तौर पर इसे व्यस्तता का नाम दिया गया है, लेकिन चर्चाओं के अनुसार, दतिया में बिगड़ते हालातों के मद्देनजर बैठक को दतिया के नजदीक से हटाना या टालना उचित समझा गया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस भारी दबाव के चलते बीजेपी अपना फैसला बदल सकती है?
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी के इतिहास में अब तक ऐसी कोई मिसाल नहीं है जहां कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के डर से पार्टी ने अपना घोषित उम्मीदवार बदला हो। यदि पार्टी झुकती है, तो यह भविष्य के लिए एक नई और जटिल परंपरा की शुरुआत होगी, जिसे पार्टी नेतृत्व फिलहाल टालना ही चाहेगा। फिलहाल दतिया में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और जिला अध्यक्ष सहित कई स्थानीय पदाधिकारियों ने अपने इस्तीफे देकर आलाकमान को असहज स्थिति में डाल दिया है।
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