Delhi Air Quality Improvement : राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण के स्तर में मामूली सुधार दर्ज किया गया है। दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) घटकर 223 पर पहुंच गया, जबकि पिछले दिन यह 245 दर्ज किया गया था। हालांकि, प्रदूषण में कमी के बावजूद दिल्ली की हवा अभी भी खराब श्रेणी में बनी हुई है। ऐसे में लोगों को फिलहाल प्रदूषण से पूरी तरह राहत नहीं मिली है। वायु गुणवत्ता में सुधार के बीच प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए GRAP-1 के प्रतिबंध भी लागू हैं।
दिल्ली के AQI में गिरावट, लेकिन हवा अब भी खराब
दिल्ली में वायु गुणवत्ता के आंकड़ों के मुताबिक, AQI में पिछले दिन के मुकाबले 22 अंकों की गिरावट आई है। एक दिन पहले राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक 245 था, जो घटकर अब 223 पर आ गया है। यह बदलाव प्रदूषण के स्तर में आंशिक सुधार का संकेत देता है। हालांकि, 201 से 300 के बीच AQI को खराब श्रेणी में रखा जाता है। इसलिए मौजूदा आंकड़े के आधार पर दिल्ली की हवा को अभी भी स्वास्थ्य के लिहाज से चिंताजनक माना जा रहा है।
गंभीर श्रेणी वाले इलाकों में भी मिली राहत
दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति को लेकर एक और राहत भरा पहलू सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले दिन राजधानी के तीन इलाके गंभीर यानी सीवियर श्रेणी में दर्ज किए गए थे। वहीं, नए आंकड़ों में किसी भी इलाके का AQI इस श्रेणी में नहीं पहुंचा। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रदूषण का खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है। हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में बने रहने के कारण लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।
खराब हवा के कारण GRAP-1 के प्रतिबंध लागू
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने के बाद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP के पहले चरण के प्रतिबंध लागू किए हैं। आयोग के अनुसार, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमान में आने वाले दिनों में AQI के खराब श्रेणी में बने रहने की संभावना जताई गई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को लागू किया गया है।
होटल और ढाबों में कोयले-लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक
GRAP-1 के तहत प्रदूषण बढ़ाने वाले कुछ स्रोतों पर नियंत्रण के उपाय किए जाते हैं। इसके अंतर्गत होटल, रेस्तरां और खुले ढाबों के तंदूर में ईंधन के रूप में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाती है। इसके अलावा, डीजल जनरेटर के उपयोग को केवल आपातकालीन या आवश्यक परिस्थितियों तक सीमित किया जाता है। इन उपायों का उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना और हवा की गुणवत्ता को और खराब होने से रोकना है।
क्या है GRAP और कब लागू होते हैं इसके अलग-अलग चरण?
GRAP प्रदूषण की स्थिति के अनुसार लागू किए जाने वाले चरणबद्ध आपातकालीन उपायों की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य वायु गुणवत्ता बिगड़ने पर समय रहते कार्रवाई करना है। इसके अलग-अलग चरण AQI के स्तर के आधार पर लागू होते हैं।
- GRAP-1: AQI 201 से 300 के बीच होने पर।
- GRAP-2: AQI 301 से 400 के बीच होने पर।
- GRAP-3: AQI 401 से 450 के बीच होने पर।
- GRAP-4: AQI 450 से अधिक होने पर।
हर चरण में प्रदूषण की गंभीरता के अनुसार अतिरिक्त प्रतिबंध और नियंत्रण उपाय लागू किए जाते हैं।
आने वाले दिनों में प्रदूषण पर रहेगी नजर
दिल्ली में AQI का 245 से घटकर 223 पर आना राहत का संकेत जरूर है, लेकिन हवा की खराब श्रेणी बरकरार रहने के कारण सतर्कता जरूरी है। मौसम और प्रदूषण के स्रोतों में बदलाव से वायु गुणवत्ता में फिर उतार-चढ़ाव हो सकता है। ऐसे में संबंधित एजेंसियां AQI के आंकड़ों और पूर्वानुमान पर नजर रखेंगी। फिलहाल GRAP-1 के उपायों के बीच राजधानी के लोगों को प्रदूषण से पूरी तरह राहत मिलने के लिए हवा की गुणवत्ता में और सुधार का इंतजार है।
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