Weather Update
Weather Update : दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में दो दिनों के संक्षिप्त ब्रेक के बाद एक बार फिर मानसून जैसी हलचल शुरू होने वाली है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) हिमालयी क्षेत्रों में दस्तक दे रहा है, जिसके प्रभाव से 2 से 5 अप्रैल 2026 के बीच गरज-चमक के साथ बारिश होने के प्रबल आसार हैं। इस मौसमी बदलाव का सबसे अधिक असर 3 और 4 अप्रैल को देखने को मिलेगा। केवल बारिश ही नहीं, बल्कि विभाग ने कुछ संवेदनशील इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी भी जारी की है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के आसमान में बादलों का डेरा रहेगा, जिससे चिलचिलाती धूप से राहत मिलने की उम्मीद है।
राजधानी दिल्ली की बात करें तो आज यानी 2 अप्रैल को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे, हालांकि बारिश की संभावना कम है। लेकिन असली बदलाव कल यानी 3 अप्रैल से देखने को मिलेगा। शुक्रवार को दिल्ली में बादलों की तेज गरज और बिजली गिरने के साथ मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। 4 अप्रैल को भी हल्की बारिश का दौर जारी रहेगा, जिससे मौसम खुशुगवार बना रहेगा। 5 अप्रैल को बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है और दोपहर के समय तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विभाग ने उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के लिए विस्तृत चार्ट जारी किया है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 3, 4 और 7 अप्रैल को बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना है। उत्तराखंड में 3 से 5 अप्रैल तक आंधी-तूफान और बारिश का दौर चलेगा। मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 3-4 अप्रैल को झमाझम बारिश हो सकती है। वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 3 से 5 अप्रैल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 4-5 अप्रैल को बादल बरसेंगे। राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में भी 2 से 7 अप्रैल के बीच रुक-रुक कर बारिश, बिजली और ओले गिरने की चेतावनी दी गई है।
यह साल मौसम के लिहाज से काफी अलग साबित हो रहा है। मार्च के आखिरी 10 दिनों में उत्तर भारत ने लगभग 5-6 दिन बारिश का सामना किया है। हिमालयी क्षेत्र में लगातार बन रहे पश्चिमी विक्षोभ के कारण उत्तराखंड और हिमाचल के ऊपरी इलाकों में अप्रैल की शुरुआत में भी बर्फबारी देखी जा रही है। हालांकि, इस बारिश से तापमान में कोई बहुत बड़ी गिरावट दर्ज नहीं की गई है, लेकिन लू (Heatwave) का प्रकोप फिलहाल टल गया है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों की हवाओं पर पड़ रहा है, जिससे सुबह और शाम के वक्त हल्की ठंडक महसूस की जा रही है।
अप्रैल के पहले हफ्ते में केवल उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भी मौसम के तेवर तल्ख रहेंगे। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और नागालैंड जैसे राज्यों में 3 से 7 अप्रैल के बीच बिजली कड़कने के साथ भारी बारिश के आसार हैं। दक्षिण भारत की ओर रुख करें तो आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में अगले 5 दिनों तक छिटपुट बारिश जारी रहेगी। केरल, तमिलनाडु और पुदुचेरी में भी 3 से 5 अप्रैल के बीच गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का सबसे अधिक प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें। 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों से अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें। कुल मिलाकर, अप्रैल का यह पहला सप्ताह पूरे भारत के लिए मिला-जुला और उमस भरा नहीं, बल्कि बारिश वाला रहने वाला है।
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