CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की जमानत प्रक्रिया से जुड़े मजिस्ट्रेट को कथित धमकी मिलने पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है। अभिजीत दिपके सशर्त जमानत पर रिहा हो चुके हैं। अब सवाल है कि धमकी किसने दी और जांच में कौन-से तथ्य सामने आएंगे?
CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की जमानत प्रक्रिया से जुड़े मजिस्ट्रेट को कथित धमकी मिलने पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है। अभिजीत दिपके सशर्त जमानत पर रिहा हो चुके हैं। अब सवाल है कि धमकी किसने दी और जांच में कौन-से तथ्य सामने आएंगे?

CJP Leaders Bail Case : दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की जमानत प्रक्रिया से जुड़े एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) को कथित तौर पर धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। हालांकि, धमकी देने वालों की पहचान और धमकी की प्रकृति को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

इस घटनाक्रम के बीच CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने कहा है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद संगठन अपनी गतिविधियां जारी रखेगा। समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, दिपके ने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में हुई गिरफ्तारियों और हिरासत की कार्रवाइयों के जरिए कार्यकर्ताओं को डराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन इन कार्रवाइयों से पीछे नहीं हटेगा। उनके बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी चर्चा तेज हो गई है।

दिल्ली पुलिस ने 16 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया था। यह कार्यक्रम कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित किया जाना था। शनिवार को उन्हें सशर्त जमानत मिल गई, जिसके बाद मंदिर मार्ग पुलिस थाने से रिहा कर दिया गया। हालांकि, जमानत की शर्तों का विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
दिपके ने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रंका के वापस आने के बाद पार्टी के कार्यकर्ता एकजुट होकर आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने बताया कि वह कानूनी मामलों पर चर्चा के लिए अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर से मिलने जा रहे थे। दिपके ने उम्मीद जताई कि दोनों नेताओं को रविवार को रिहा किया जा सकता है। हालांकि, उनकी रिहाई को लेकर अंतिम स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
CJP के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रंका और कुछ अन्य लोगों को जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश के आरोप में गिरफ्तार किया था। बताया गया कि पुलिस ने कार्रवाई के दौरान इस बात का हवाला दिया कि जंतर-मंतर को संबंधित प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया था। गिरफ्तारी के बाद दास और रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

अजिंक्य शिंदे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। वहीं, SEM को कथित धमकी देने के मामले में दर्ज FIR ने घटनाक्रम को नया मोड़ दिया है। फिलहाल पुलिस धमकी से जुड़े तथ्यों, आरोपियों की पहचान और घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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