Dharamsthal Dispute : कर्नाटक के धर्मस्थल मंदिर मामले में बुधवार को बड़ा मोड़ सामने आया, जब विशेष जांच टीम (SIT) ने इस केस के मुख्य शिकायतकर्ता चिन्मय के खिलाफ 10 नए आपराधिक मामले दर्ज किए। इन मामलों में जालसाजी, झूठी गवाही और सबूत गढ़ने से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं।

SIT का कहना है कि चिन्मय ने मंदिर परिसर में लोगों को दफनाने और यौन शोषण के जो गंभीर आरोप लगाए थे, वे झूठे और मनगढ़ंत साबित हो रहे हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि चिन्मय ने जानबूझकर फर्जी सबूत पेश किए, जिनमें एक खोपड़ी और कुछ मानव हड्डियां शामिल थीं।

फॉरेंसिक रिपोर्ट ने किया खुलासा
11 जुलाई को मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान में चिन्मय ने दावा किया था कि धर्मस्थल में एक महिला के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई और शव मंदिर में दफनाया गया। सबूत के तौर पर उसने जो अवशेष (हड्डियां और खोपड़ी) पेश कीं, उनकी फॉरेंसिक रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि वे किसी पुरुष के हैं, न कि महिला के। इससे चिन्मय के दावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
चिन्मय की पृष्ठभूमि और दावे
चिन्मय का दावा है कि वह 1998 से 2014 तक धर्मस्थल मंदिर में कार्यरत था। उसने कहा कि उस पर दबाव डालकर 100 से अधिक महिलाओं और बच्चियों के शव दफन करवाए गए थे। उसके इन आरोपों के आधार पर ही सरकार ने मामले की जांच SIT को सौंपी थी।
SIT की अब तक की जांच
SIT ने अब तक 17 स्थानों पर खुदाई की है, लेकिन केवल दो स्थानों पर मानव कंकाल बरामद हुए हैं – और दोनों पुरुषों के अवशेष निकले हैं। किसी महिला या नाबालिग का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इससे संकेत मिलते हैं कि चिन्मय द्वारा किए गए दावों में गंभीर विसंगतियां हैं।

चिन्मय वर्तमान में पिछले पांच दिनों से SIT की हिरासत में है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या चिन्मय के पीछे कोई राजनीतिक या व्यक्तिगत मकसद था।
धर्मस्थल विवाद में चिन्मय की भूमिका अब सवालों के घेरे में आ गई है। जहां पहले यह मामला गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का प्रतीक बन रहा था, वहीं अब यह फर्जी आरोप और सबूत गढ़ने की दिशा में मुड़ता नजर आ रहा है। SIT की जांच अभी जारी है, और आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े और भी चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।











