Nuclear Diplomacy Crisis: परमाणु वार्ता से चीन का इंकार, अमेरिका-रूस को झटका, वैश्विक सुरक्षा पर मंडराया खतरा

Nuclear Diplomacy Crisis: भारत-अमेरिका टैरिफ विवाद के बीच चीन ने अमेरिका और रूस को एक बड़ा झटका दिया है। चीन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह परमाणु अप्रसार (Nuclear Non-Proliferation) को लेकर अमेरिका और रूस के साथ किसी भी त्रिपक्षीय वार्ता में शामिल नहीं होगा। इस कदम से 2025 में होने वाली संभावित परमाणु अप्रसार समीक्षा बैठक (Review Conference) पर संकट गहरा गया है।

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चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बयान जारी कर कहा, “अमेरिका और रूस के साथ त्रिपक्षीय वार्ता में चीन की भागीदारी की उम्मीद न तो तर्कसंगत है और न ही व्यावहारिक, क्योंकि तीनों देशों की परमाणु क्षमताओं में भारी असमानता है।” चीन का यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

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परमाणु अप्रसार संधि और वार्ता का इतिहास

वर्ष 1968 में हस्ताक्षरित परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का उद्देश्य था – परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना, निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देना और परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना। संधि के तहत हर पांच वर्ष में समीक्षा सम्मेलन होता है। लेकिन इस बार चीन के इनकार के कारण 2025 में प्रस्तावित सम्मेलन अधर में लटक गया है।

रूस-अमेरिका के बीच बढ़ा तनाव

हाल ही में 5 अगस्त 2025 को रूस ने अमेरिका के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए INF संधि (Intermediate-Range Nuclear Forces Treaty) से खुद को अलग कर लिया। यह संधि 1987 से प्रभावी थी और इसमें 500 से 5500 किमी रेंज वाली मिसाइलों की तैनाती पर रोक थी। अमेरिका द्वारा रूस पर टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद यह प्रतिक्रिया आई।

चीन का परमाणु विस्तार बढ़ा रहा चिंता

SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2023 में चीन के पास 410 परमाणु हथियार थे, जो 2024 तक बढ़कर 500 हो गए। साथ ही चीन ने इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBMs) विकसित करने में तेजी लाई है। यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।

अमेरिका की बदली रणनीति और बढ़ता खतरा

साल 2024 में अमेरिका ने अपनी न्यूक्लियर एंप्लॉयमेंट गाइडेंस नीति में बड़ा बदलाव किया, जिसमें चीन, रूस और उत्तर कोरिया के साथ संभावित परमाणु संघर्ष की स्थिति में विशेष निर्देश दिए गए। इसके तहत युद्ध की तैयारी के संकेत भी दिए गए, जिससे वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ गया।

चीन-रूस की रणनीतिक साझेदारी

जुलाई 2025 में जापान सागर में चीन, रूस और उत्तर कोरिया की संयुक्त नौसेना अभ्यास (Joint Naval Drill) ने अमेरिका की चिंताओं को और गहरा कर दिया है। यह अभ्यास संकेत देता है कि परमाणु नीति को लेकर चीन और रूस में गहरा तालमेल बन सकता है, जो अमेरिका की रणनीतिक स्थिति को चुनौती देगा।

चीन का त्रिपक्षीय परमाणु वार्ता से इंकार वैश्विक रणनीतिक संतुलन के लिए एक गंभीर चेतावनी है। जहां एक ओर अमेरिका और रूस के बीच भरोसे की खाई बढ़ रही है, वहीं चीन का परमाणु विस्तार और उसकी आक्रामक कूटनीति अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे का संकेत है।

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