Dhirendra Shastri : अयोध्या के राम मंदिर में दान पात्र से चोरी के मामले ने न केवल प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा रखा है, बल्कि आध्यात्मिक जगत को भी झकझोर दिया है। इस संवेदनशील विषय पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक नई प्रतिक्रिया दी है। दान चोरी की घटना पर मौन रहने के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “जिन्होंने भगवान को नहीं छोड़ा, वे हमें क्या छोड़ेंगे?” उन्होंने आगे अपनी चिर-परिचित शैली में कहा कि इस मामले में अक्सर बड़े लोग बच निकलते हैं और छोटे कर्मचारी फंस जाते हैं। धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और दान की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच काफी चर्चा में है।

‘पर्ची’ और नाम बताने के रहस्य पर चुप्पी का कारण
जब धीरेंद्र शास्त्री से यह पूछा गया कि वह अपनी दिव्य ‘पर्ची’ के माध्यम से चोरी करने वालों के नाम क्यों नहीं उजागर कर रहे, तो उन्होंने बहुत ही तार्किक और गंभीर उत्तर दिया। उन्होंने कहा, “अगर हमने पर्ची खोलकर नाम बता दिए, तो वे हमें ही निपटा देंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज नहीं तो कल, वे हमें रास्ते से हटा देंगे और फिर हम किसी और के नाम उजागर करने की स्थिति में भी नहीं रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में उनकी चुप्पी मजबूरी नहीं, बल्कि एक रणनीति है। गौरतलब है कि आचार्य धीरेंद्र शास्त्री पहले भी दान चोरी करने वालों को ‘महादंड’ मिलने की चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने यह सुझाव भी दिया था कि मंदिर प्रबंधन और दान की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां संत परंपरा से जुड़े लोगों को सौंपी जानी चाहिए।

एसआईटी की जांच और ट्रस्टी चंपत राय का इस्तीफा
राम मंदिर दान चोरी मामले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तुरंत एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। जांच की आंच ट्रस्ट के वरिष्ठ अधिकारियों तक भी पहुंची है। मामले में आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है और उन सभी की गिरफ्तारी भी हो गई है। सबसे चर्चित घटनाक्रम के रूप में मंदिर के मुख्य ट्रस्टी चंपत राय का इस्तीफा सामने आया है, जिनसे एसआईटी ने लंबी पूछताछ भी की है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मंदिर संचालन में अन्य कई तरह की अनियमितताओं के संकेत भी मिल रहे हैं।
जांच का दायरा बढ़ा, रिपोर्ट के लिए मिला अतिरिक्त समय
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी ने अपनी जांच का दायरा काफी विस्तृत कर दिया है। मंदिर के वित्तीय लेनदेन से लेकर दान पेटी के प्रबंधन तक की गहन जांच की जा रही है। जांच की जटिलता और नए सबूतों के सामने आने के कारण, एसआईटी को अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करने के लिए अदालत ने 15 दिनों का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। राम मंदिर चंदा चोरी का यह विवाद अब मंदिर की आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। सभी की निगाहें अब एसआईटी की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस पूरे मामले में छिपे बड़े चेहरों और संस्थागत कमियों को उजागर कर सकती है।
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