Madhya Pradesh के नर्मदापुरम (सिवनी मालवा) में पदस्थ एक महिला सेशंस जज को मिल रही धमकियों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर घटना का मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तीन दिनों के भीतर यह स्पष्ट करें कि दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज करने और उन्हें पकड़ने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सेशंस जज तबस्सुम खान ने अगस्त 2022 के एक चर्चित मॉब लिंचिंग मामले में 14 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस घटना में एक व्यक्ति की जान गई थी। फैसले के बाद से ही जज को लगातार धमकियां मिल रही हैं, जिसने न्यायपालिका की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: न्यायिक निडरता से समझौता नहीं
बुधवार को हाईकोर्ट की डबल बेंच, जिसमें जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह शामिल थे, ने इस मामले को न्यायिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया। बेंच ने स्पष्ट कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि एक न्यायिक अधिकारी को उनके द्वारा दिए गए कानूनी आदेशों के कारण धमकियां दी जा रही हैं। अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों को उनके द्वारा दिए गए आदेशों के लिए डराना-धमकाना कानून के शासन (Rule of Law) की नींव पर प्रहार है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी असंतुष्ट पक्ष के पास उच्च न्यायालय में अपील या पुनरीक्षण (Revision) का कानूनी रास्ता खुला होता है, लेकिन किसी फैसले से नाराज होकर जज को धमकाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और अगली सुनवाई की तैयारी
हाईकोर्ट ने नर्मदापुरम के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देशित किया है कि वे जज तबस्सुम खान की सुरक्षा को तत्काल प्रभाव से और अधिक पुख्ता करें। कोर्ट में यह जानकारी दी गई कि जज को पहले से सुरक्षा प्रदान की गई है, जिसके बाद बेंच ने एसपी को एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। इस हलफनामे में यह विवरण होना अनिवार्य है कि उन अज्ञात लोगों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की गई है जिन्होंने जज को धमकियां दी हैं। इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की गई है। न्यायपालिका की मर्यादा और अधिकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट का यह रुख काफी कड़ा माना जा रहा है।
न्यायिक बिरादरी और वकीलों का जज खान को समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने भी कड़ा रुख अपनाया है। एसोसिएशन ने जज तबस्सुम खान के प्रति अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त करते हुए उन्हें दी जा रही धमकियों की कड़े शब्दों में निंदा की है। एसोसिएशन का कहना है कि एक जज अपना कर्तव्य कानून के दायरे में रहकर पूरी निष्ठा से निभाता है, और ऐसी धमकियां न केवल संबंधित अधिकारी का मनोबल गिराती हैं, बल्कि समाज में कानून के डर को भी खत्म करने का प्रयास करती हैं। न्यायिक बिरादरी का मानना है कि यदि जजों को इसी तरह निशाना बनाया गया, तो न्याय प्रक्रिया प्रभावित होगी। फिलहाल, पूरा कानूनी जगत और प्रशासन इस मामले पर पैनी नजर रखे हुए है और सभी को 9 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई का इंतजार है।
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