Ladakh Unrest: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत विशेष संवैधानिक अधिकार देने की मांग को लेकर बुधवार को लेह में बड़ा बवाल देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने CRPF की गाड़ी, पुलिस वैन और कई अन्य सरकारी वाहनों में आग लगा दी। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसमें कुछ लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की पुष्टि हुई है।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गृह मंत्रालय ने बड़ा बयान जारी करते हुए समाजसेवी सोनम वांगचुक को हिंसा भड़काने का जिम्मेदार बताया है। मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक ने अपने बयानों से भीड़ को उकसाया और आंदोलन को अरब स्प्रिंग और नेपाल की जनरेशन-Z आंदोलन जैसे उदाहरणों से जोड़कर अधिक उग्र बना दिया।
बता दें कि सोनम वांगचुक ने 10 सितंबर से लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की थी। हालांकि, सरकार पहले ही इस विषय पर संवाद की प्रक्रिया चला रही थी। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति (HPC) और उपसमितियों के माध्यम से लेह एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस से कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं।
अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84% किया गया।
महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण दिया गया।
भोटी और पुरगी भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिला।
1800 से अधिक सरकारी पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, यह आंदोलन अब राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित होता जा रहा है। कुछ असंतुष्ट समूह इस संवाद प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं और उसे बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्रालय ने दावा किया कि सोनम वांगचुक के बयानों ने भीड़ को उकसाया, जिसके बाद सुबह 11:30 बजे भीड़ ने एक राजनीतिक पार्टी के दफ्तर और सीईसी लेह के कार्यालय पर हमला किया।
इस दौरान आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस पर हमला किया गया, जिसमें 30 से अधिक पुलिस और CRPF जवान घायल हो गए। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिससे कुछ प्रदर्शनकारी हताहत हुए। दोपहर 4 बजे तक स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया।
गृह मंत्रालय ने दोहराया कि सरकार लद्दाख की जनता की संवैधानिक आकांक्षाओं को सम्मान देने और उन्हें पर्याप्त संरक्षण देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
हालांकि, सरकार का यह भी कहना है कि हिंसा और भड़काऊ बयानबाजी से समाधान की प्रक्रिया बाधित होती है। मंत्रालय ने सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल समाप्त करने के समय को भी प्रश्नों के घेरे में बताया है, क्योंकि उन्होंने यह कदम हिंसा के ठीक बाद उठाया।लेह की हिंसा ने लद्दाख की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। जहां एक ओर सरकार संवैधानिक प्रक्रिया के तहत समाधान की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर, वांगचुक जैसे समाजसेवी अब नए आंदोलन का चेहरा बनते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में लद्दाख की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
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