Digital Strike 2026
Digital Strike 2026: केंद्र की मोदी सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के अवैध कारोबार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को और सख्त कर दिया है। सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अवैध रूप से संचालित हो रही 242 नई बेटिंग (सट्टेबाजी) और गैंबलिंग (जुआ) वेबसाइट्स को ब्लॉक कर दिया है। मनी गेम्स पर पहले ही शिकंजा कसने के बाद, अब इन वेबसाइट्स को निशाना बनाया गया है जो बिना किसी वैध लाइसेंस के भारतीय बाजार में सक्रिय थीं। इस हालिया कार्रवाई के साथ, भारत में अब तक प्रतिबंधित की गई अवैध सट्टेबाजी साइट्स की कुल संख्या 7,800 के पार पहुंच गई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को ऑनलाइन सट्टेबाजी के चंगुल से बचाना है। केंद्र सरकार इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि ये वेबसाइट्स आकर्षक विज्ञापनों और भारी मुनाफे का लालच देकर युवाओं को अपना निशाना बना रही हैं। यह न केवल लोगों को वित्तीय रूप से बर्बाद कर रहा है, बल्कि समाज में जुए की लत जैसी बुराइयों को भी बढ़ावा दे रहा है। सरकार की यह प्रतिबद्धता दर्शाती है कि वह नागरिकों की सुरक्षा और इंटरनेट के स्वस्थ उपयोग के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
हाल ही में संसद द्वारा ‘ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025’ को मंजूरी मिलने के बाद सरकार की शक्तियों में काफी इजाफा हुआ है। इस नए कानून के आने के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने अपनी निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई को तेज कर दिया है। सरकार अब केवल कानून ही नहीं, बल्कि उन्नत तकनीकों का भी सहारा ले रही है ताकि इन वेबसाइट्स के दर्पण लिंक (Mirror Links) और नए डोमेन को तुरंत ट्रैक कर ब्लॉक किया जा सके। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी प्लेटफॉर्म को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आंकड़ों पर गौर करें तो 2022 से ही MeitY ने इस दिशा में सक्रियता दिखाई है। पिछले तीन वर्षों में 1,400 से अधिक ऐसे ऐप्स और वेबसाइट्स को बंद करने के आदेश दिए गए जो देश की संप्रभुता और जनता के वित्तीय हितों के लिए खतरा बने हुए थे। ऑनलाइन गेमिंग बिल के कानून बनने के बाद अब इन साइट्स के खिलाफ कार्रवाई की गति कई गुना बढ़ गई है। यह कदम न केवल अवैध गतिविधियों को रोकता है, बल्कि वैध और जिम्मेदार गेमिंग उद्योग के लिए एक सुरक्षित माहौल भी तैयार करता है।
बैक-टू-बैक किए गए इन एक्शन्स से सरकार का इरादा साफ है कि भविष्य में भी ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि को सिर उठाने का मौका नहीं दिया जाएगा। मंत्रालय लगातार इंटरनेट स्पेस की निगरानी कर रहा है ताकि नए नामों के साथ आने वाली पुरानी साइट्स को भी तुरंत पहचाना जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कड़े रुख से अवैध ऑनलाइन अर्थव्यवस्था की कमर टूटेगी और लोग अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रख सकेंगे। सरकार आने वाले समय में जनजागरूकता अभियान भी चला सकती है ताकि लोग स्वयं इन साइट्स की पहचान कर सकें और इनके झांसे में न आएं।
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