Dinesh Phalhari Apology: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज और राधा केलीकुंज आश्रम को लेकर पिछले दिनों चर्चा में आए श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने अब अपने बयानों पर सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। उन्होंने कहा कि उनके किसी भी शब्द से अगर प्रेमानंद महाराज, उनके अनुयायियों या सनातन समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो वह उसके लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांगते हैं।
संत समाज के सम्मान की बात कही
दिनेश फलाहारी ने अपने माफीनामे में प्रेमानंद महाराज को संपूर्ण सनातन हिंदू समाज का गौरव बताया। उन्होंने कहा कि संतों के प्रति सम्मान उनकी प्राथमिकता है और भविष्य में वह ऐसा कोई बयान नहीं देंगे, जिससे किसी संत, अनुयायी या सनातनी की भावनाएं आहत हों। उनके इस बयान के बाद विवाद को शांत करने की कोशिश के तौर पर इसे देखा जा रहा है।
विराट कोहली को लेकर किया था बड़ा दावा
दरअसल, विवाद उस समय बढ़ा था जब दिनेश फलाहारी ने दावा किया था कि राजस्थान की एक निजी कंपनी ने प्रेमानंद महाराज को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से क्रिकेटर विराट कोहली को कथित तौर पर 5 करोड़ रुपये देकर उनके दर्शन के लिए बुलाया था। यह दावा सामने आने के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इसको लेकर काफी चर्चा हुई थी।
विराट कोहली की टीम ने आरोपों को नकारा
दिनेश फलाहारी के इस दावे को विराट कोहली की टीम और उनके प्रवक्ता ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। टीम की ओर से इन आरोपों को झूठा, बेबुनियाद और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया गया। इसके बाद इस मामले में विवाद और बढ़ गया और दिनेश फलाहारी के बयानों को लेकर सवाल उठने लगे।
शिष्य की मौत के बाद शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला उस समय चर्चा में आया था, जब राधा केलीकुंज आश्रम से जुड़े प्रेमानंद महाराज के एक शिष्य की रहस्यमयी मौत की खबर सामने आई थी। इसके बाद आश्रम की व्यवस्था और वहां की परिस्थितियों को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हुईं। हालांकि, इन चर्चाओं और लगाए गए आरोपों को अलग-अलग दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ को लिखा था पत्र
दिनेश फलाहारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने संत की जान को गंभीर खतरा बताते हुए उन्हें Z+ सुरक्षा देने की मांग की थी। इस मांग ने भी मामले को व्यापक सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा में ला दिया था।
आश्रम में भूमाफिया के आरोप लगाए थे
फलाहारी ने अपने पूर्व बयानों में यह भी आरोप लगाया था कि केलीकुंज आश्रम से जुड़े कुछ लोग संत का चोला पहनकर कथित तौर पर प्रॉपर्टी कारोबार में शामिल हैं। उन्होंने दावा किया था कि ऐसी परिस्थितियों से दुखी होकर प्रेमानंद महाराज यमुना पार बेलवन आश्रम चले गए हैं। हालांकि, ये आरोप दिनेश फलाहारी की ओर से लगाए गए थे और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
अब सार्वजनिक माफी से बदला माहौल
अब दिनेश फलाहारी द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगे जाने के बाद मामले का तापमान कुछ कम होता नजर आ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संत या सनातनी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। साथ ही उन्होंने भविष्य में संत समाज के सम्मान को ध्यान में रखते हुए बयान देने की बात कही है।
विवाद के बीच संतों के सम्मान पर जोर
दिनेश फलाहारी की माफी के बाद प्रेमानंद महाराज से जुड़े विवाद पर आगे की चर्चा किस दिशा में जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल उनके बयान से इतना स्पष्ट है कि उन्होंने अपने पूर्व वक्तव्यों से पैदा हुए विवाद को लेकर खेद जताया है। वहीं, वृंदावन के आश्रमों और धार्मिक संस्थानों की व्यवस्थाओं को लेकर सार्वजनिक चर्चा अब भी जारी है।
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