DMK vs Congress : देश के राजनीतिक गलियारों में इस समय भारी हलचल मची हुई है। विपक्षी गठबंधन (INDIA) के भीतर लंबे समय से सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब एक भीषण ज्वालामुखी का रूप ले चुकी है। तमिलनाडु की सत्ता से बाहर होते ही द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने अपने तेवर बेहद सख्त कर लिए हैं। पार्टी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी पर अब तक का सबसे सीधा और तीखा हमला बोला है। डीएमके के इस आक्रामक रुख से साफ है कि विपक्षी खेमे में सब कुछ ठीक नहीं है और आने वाले दिनों में यह खाई और चौड़ी हो सकती है।

मुखपत्र ‘मुरासोली’ और आईटी विंग ने साधा निशाना
डीएमके ने राहुल गांधी के खिलाफ रणनीति के तहत चौतरफा हमला शुरू किया है। इसके लिए पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और अपने पारंपरिक मुखपत्र ‘मुरासोली’ को हथियार बनाया है। डीएमके की आईटी विंग ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए राहुल गांधी को एक ‘बड़ा मजाक’ करार दिया। पार्टी का आरोप है कि राहुल गांधी की अपरिपक्वता और गलत फैसलों के कारण ही राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता को गहरा आघात लगा है। इस बयान के बाद देश भर में सियासी पारा गरमा गया है।

‘संकट में हमने संभाला, मौका मिलते ही मिला धोखा’
डीएमके के सोशल मीडिया विंग ने कांग्रेस के इतिहास को याद दिलाते हुए तीखा तंज कसा है। पार्टी ने लिखा कि जब कांग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी और अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी, तब डीएमके ने ही उसे अपने कंधों पर उठाकर सहारा दिया था। लेकिन कांग्रेस ने इस वफादारी का सिला धोखे से दिया। डीएमके का आरोप है कि जैसे ही राहुल गांधी को राजनीति के मैदान में कोई नया और चमकदार खिलौना (नया राजनीतिक जोड़ीदार) दिखाई दिया, उन्होंने वर्षों पुराने और भरोसेमंद साथी को दरकिनार कर तुरंत अपना पाला बदल लिया।
राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर उठे गंभीर सवाल
सोमवार को प्रकाशित डीएमके के मुखपत्र ‘मुरासोली’ के संपादकीय में राहुल गांधी की राजनीतिक दूरदर्शिता और समझ पर गंभीर सवाल खड़े किए गए। अखबार ने लिखा कि जो राहुल गांधी पूरे देश में घूम-घूमकर दूसरों को विपक्षी एकता का पाठ पढ़ाते फिरते हैं, वह असल में खुद विभिन्न राज्यों में इस एकता को छिन्न-भिन्न करने के सबसे बड़े जिम्मेदार हैं। संपादकीय में कहा गया कि राहुल गांधी कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है, जिसके कारण गठबंधन के अन्य दल खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
वामपंथियों और कांग्रेस के बीच का अंतर्विरोध उजागर
अपने दावों को मजबूत करने के लिए ‘मुरासोली’ ने केरल के हालिया घटनाक्रमों का हवाला दिया। संपादकीय में लिखा गया कि चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने खुद केरल के मुख्यमंत्री और वामपंथी नेता पिनाराई विजयन को गिरफ्तार करने की मांग की थी। इस बयान के कारण वामपंथी नेता आज भी कांग्रेस और राहुल गांधी से बेहद नाराज हैं। वामपंथी दल अब खुलेआम यह सवाल पूछ रहे हैं कि देश के राजनीतिक पटल पर कांग्रेस का असली मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से है या फिर वह अपने ही सहयोगी दलों को खत्म करने की साजिश रच रही है?
तमिलनाडु का सियासी गणित
इस पूरी राजनीतिक जंग की असली जड़ तमिलनाडु के हालिया विधानसभा चुनाव और उसके बाद बदले समीकरणों में छिपी है। चुनाव के दौरान कांग्रेस ने डीएमके के साथ गठबंधन में रहकर चुनाव लड़ा और सूबे में 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन सत्ता की मलाई का समय आते ही कांग्रेस ने करवट बदल ली। चुनाव परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद कांग्रेस ने डीएमके का साथ छोड़ दिया और अभिनेता से नेता बने विजय की नई पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के साथ हाथ मिलाकर उनकी सरकार में शामिल होने का फैसला कर लिया।
‘इंडी’ गठबंधन की अहम बैठक का किया पूर्ण बहिष्कार
कांग्रेस के इस अप्रत्याशित कदम को डीएमके ने अपनी पीठ में छुरा घोंपने जैसा माना है। इस बड़े धोखे से आहत और नाराज डीएमके ने अब राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को कड़ा सबक सिखाने का मन बना लिया है। इसी कड़ी में डीएमके ने कांग्रेस के नेतृत्व में बुलाई गई ‘INDIA’ गठबंधन की आगामी उच्च स्तरीय बैठक का पूर्ण बहिष्कार करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। डीएमके नेतृत्व का स्पष्ट कहना है कि जो पार्टी अपने सहयोगियों का सम्मान नहीं कर सकती, उसके द्वारा बुलाई गई किसी भी बैठक में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
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