Rabies Fact Check:
Rabies Fact Check: रेबीज एक अत्यंत घातक और जानलेवा वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों, विशेषकर कुत्तों की लार के माध्यम से फैलता है। यह सीधा मनुष्य के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) पर प्रहार करता है। हाल ही में सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर का एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें एक लड़का कथित तौर पर कुत्ते के काटने के चार महीने बाद ‘कुत्ते की तरह भौंकता’ हुआ दिखाई दे रहा है। इस वीडियो ने आम जनता के बीच भारी दहशत और भ्रम पैदा कर दिया है। लोग इसे रेबीज का पुख्ता लक्षण मान रहे हैं, लेकिन क्या चिकित्सा विज्ञान इस बात का समर्थन करता है?
इस सनसनीखेज वीडियो की सच्चाई सामने लाने के लिए एम्स नई दिल्ली से प्रशिक्षित अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राहुल चावला ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट रूप से इस धारणा को खारिज कर दिया कि रेबीज से संक्रमित व्यक्ति कुत्ते की तरह भौंकने लगता है। डॉ. चावला के अनुसार, रेबीज एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जो मस्तिष्क के स्टेम को गंभीर रूप से प्रभावित करती है, लेकिन यह रोगी के व्यवहार को किसी जानवर की नकल करने में नहीं बदलती। सोशल मीडिया पर फैल रही यह जानकारी वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह निराधार है।
डॉक्टरों के अनुसार, रेबीज होने पर गले की मांसपेशियों और स्वरयंत्र (Larynx) में अत्यधिक दर्दनाक ऐंठन पैदा होती है। इस स्थिति के कारण मरीज को कुछ भी निगलने में असहनीय पीड़ा होती है, जिससे उसके भीतर पानी के प्रति गहरा डर बैठ जाता है, जिसे चिकित्सा भाषा में ‘हाइड्रोफोबिया’ कहा जाता है। गले में होने वाली इन ऐंठनों के कारण कभी-कभी मरीज के गले से कुछ असामान्य आवाजें निकल सकती हैं, जो सुनने में अजीब लग सकती हैं, लेकिन वे किसी कुत्ते के भौंकने जैसी नहीं होतीं। वायरल वीडियो में दिख रहा लड़के का व्यवहार रेबीज के शास्त्रीय लक्षणों से मेल नहीं खाता।
डॉ. चावला का मानना है कि वीडियो में दिख रहे लक्षण ‘फंक्शनल न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर’ (FND) के हो सकते हैं, जिसे पूर्व में ‘हिस्टीरिया’ के नाम से जाना जाता था। यह स्थिति अक्सर किसी गहरे मानसिक सदमे या डर के कारण उत्पन्न होती है। संभव है कि कुत्ते के काटने के बाद लड़के के मन में बैठा गहरा डर इस तरह के शारीरिक व्यवहार के रूप में प्रकट हो रहा हो। ऐसे मामलों को रेबीज का नाम देकर सनसनी फैलाने के बजाय, मरीज का गहन न्यूरोलॉजिकल और साइकैट्रिक (मनोचिकित्सीय) मूल्यांकन करना अनिवार्य है।
इंटरनेट के युग में स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक खबरें जंगल की आग की तरह फैलती हैं। बिना किसी डॉक्टरी परामर्श या वैज्ञानिक प्रमाण के ऐसी सूचनाओं को साझा करना समाज में अनावश्यक डर और गलत धारणाएं पैदा करता है। रेबीज के मामले में बचाव ही एकमात्र उपाय है; कुत्ता काटने पर तुरंत टीकाकरण करवाना चाहिए। मेडिकल तथ्यों की पुष्टि किए बिना किसी भी वीडियो पर भरोसा न करें। सही जानकारी ही आपको और आपके अपनों को सुरक्षित रख सकती है। किसी भी असामान्य लक्षण की स्थिति में सोशल मीडिया के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह लें।
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