Trump NATO Exit
Trump NATO Exit : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक तेवरों से वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। व्हाइट हाउस में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) पर सीधा प्रहार करते हुए उसे “कागजी शेर” करार दिया। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में ईरान के साथ संघर्ष चरम पर है। उन्होंने खुले तौर पर आरोप लगाया कि इस कठिन समय में नाटो और अन्य पुराने सहयोगी देशों ने अमेरिका का साथ देने के बजाय दूरी बनाए रखी। ट्रंप की यह टिप्पणी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में अमेरिका के भविष्य के रुख को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर रही है।
यह तीखा बयान नाटो के महासचिव मार्क रूटे के वाशिंगटन दौरे से ठीक पहले आया है। रूटे जल्द ही राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं, जिसमें ईरान युद्ध की रणनीति और नाटो की भूमिका पर महत्वपूर्ण चर्चा होनी है। हालांकि, ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि ईरान संघर्ष ने नाटो के प्रति उनके नजरिए को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने दावा किया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे नेता भी अब नाटो की ताकत से नहीं डरते, क्योंकि यह गठबंधन अब केवल नाम का रह गया है और जमीनी स्तर पर प्रभावहीन साबित हो रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो सदस्य देशों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब अमेरिका ने संकट के समय सहयोग की अपेक्षा की, तो इन देशों ने “मदद न करने की पूरी कोशिश की।” ट्रंप ने उन विशिष्ट देशों के नाम तो नहीं लिए जिनसे उन्होंने संवाद किया था, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि अब जब अमेरिका अपनी स्थिति मजबूत कर चुका है, तो यही देश अचानक समर्थन देने के लिए आगे आ रहे हैं। उनके अनुसार, यह “अवसरवादी” रवैया अमेरिका को स्वीकार्य नहीं है। ट्रंप के इस बयान से स्पष्ट है कि वे नाटो के भीतर वित्तीय और सैन्य साझाकरण के पुराने ढांचे से काफी असंतुष्ट हैं।
ट्रंप का गुस्सा केवल यूरोपीय देशों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख एशियाई सहयोगियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिका के हजारों सैनिक इन देशों की सीमाओं पर तैनात हैं ताकि उन्हें क्षेत्रीय खतरों से सुरक्षा मिल सके, लेकिन बदले में इन देशों ने संकट के समय अमेरिका के लिए पर्याप्त योगदान नहीं दिया। ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ये देश अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं, तो उन्हें संघर्ष के समय अमेरिका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना होगा।
हैरान करने वाली बात यह रही कि जहां ट्रंप ने अपने सहयोगियों की आलोचना की, वहीं उन्होंने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के साथ अपने संबंधों को “शानदार” बताया। उन्होंने कहा कि परमाणु खतरों के बीच अमेरिकी सैनिकों की तैनाती एक ऐसी स्थिति है जिसे टाला जा सकता था। इसके साथ ही, ट्रंप ने नाटो के साथ बिगड़ते संबंधों के पीछे ‘ग्रीनलैंड प्रस्ताव’ को भी एक बड़ी वजह बताया। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लेने का विचार रखा था, तब नाटो देशों ने इसका विरोध किया था, जिससे उनके बीच की दूरियां और बढ़ गईं।
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