Trump on Iran
Trump on Iran:अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान के साथ हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। फ्लोरिडा से लौटने के बाद जॉइंट बेस एंड्रयूज पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस बात की रत्ती भर भी परवाह नहीं है कि ईरान भविष्य में बातचीत की मेज पर वापस आता है या नहीं। ट्रंप के इस बयान ने दुनिया भर के राजनयिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “अगर वे वापस नहीं आते हैं तो भी मुझे कोई दिक्कत नहीं है।” उनके इस रुख से साफ है कि अमेरिका अब ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते के लिए अपनी शर्तों से समझौता करने को तैयार नहीं है।
ट्रंप ने इस्लामाबाद वार्ता के संदर्भ में एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि ईरान ने बातचीत के दौरान ऐसे संकेत दिए हैं कि वह अभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिशों में जुटा है। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि ईरान की मंशा पिछली रात की चर्चाओं में बिल्कुल साफ हो गई थी। हालांकि, उन्होंने एक सख्त संकल्प दोहराते हुए कहा, “ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा।” ट्रंप का यह बयान ईरान की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ रणनीति को और मजबूत करता है। उन्होंने साफ कर दिया कि तेहरान के साथ कोई औपचारिक समझौता हो या न हो, अमेरिकी प्रशासन ईरान को परमाणु संपन्न राष्ट्र नहीं बनने देगा।
व्हाइट हाउस के बाहर और जॉइंट बेस एंड्रयूज, दोनों ही स्थानों पर ट्रंप ने अपनी जीत का अटूट विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका हर स्थिति में विजेता बनकर उभरेगा। ट्रंप के अनुसार, “चाहे समझौता हो या न हो, अमेरिका के नजरिए से जीत हमारी ही तय है।” उन्होंने ईरान की वर्तमान आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान इस समय बेहद खराब हालत में है और वे काफी व्याकुल (Desperate) नजर आ रहे हैं। 21 घंटे तक चली लंबी बातचीत के बाद अमेरिका का मानना है कि उसने ईरान की कमजोरियों और उसकी वर्तमान स्थिति को बहुत गहराई से समझ लिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि परमाणु हथियार हासिल करने का ईरान के लिए कोई रास्ता नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ऐसा किसी भी हाल में नहीं होने देगा। राष्ट्रपति ने खुलासा किया कि इस्लामाबाद में हुई वार्ता के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सामने यह संदेश बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में रख दिया गया था। ट्रंप का कहना है कि वे इस मुद्दे पर कोई ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं। उनके अनुसार, “हमने पिछली रात बातचीत के दौरान उनके सामने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि उनके लिए परमाणु शक्ति बनने का कोई भी रास्ता अब खुला नहीं है।”
पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 21 घंटों तक मैराथन बैठक हुई, लेकिन दोनों देशों के बीच की गहरी खाई को पाटा नहीं जा सका। इस गतिरोध पर अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। वेंस ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अमेरिका की मांग बहुत सीधी और स्पष्ट है। उन्होंने कहा, “हमें ईरान की तरफ से एक पक्का और विश्वसनीय वादा चाहिए कि वे न तो परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करेंगे और न ही ऐसे संसाधन जुटाएंगे जिनकी मदद से वे भविष्य में तेजी से परमाणु हथियार हासिल कर सकें।” वेंस के इस बयान से स्पष्ट है कि जब तक ईरान अपनी परमाणु योजनाओं को पूरी तरह बंद करने का लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक अमेरिका का कड़ा रुख जारी रहेगा।
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