अंतरराष्ट्रीय

Donald Trump Announcement: डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, अब अमेरिकी झंडा जलाने पर होगी एक साल की जेल

Donald Trump Announcement: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से सख्त रुख अपनाते हुए देशभक्ति से जुड़े मामलों में बड़ा कदम उठाया है। ट्रंप ने घोषणा की है कि यदि कोई भी व्यक्ति अमेरिका का राष्ट्रीय ध्वज जलाता है, तो उसे कानून के तहत एक साल की जेल की सजा भुगतनी होगी। यह फैसला देशभर में चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि इसके ज़रिए ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्र के प्रतीकों के प्रति सम्मान को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है।

ट्रंप ने कहा “झंडा हमारे सम्मान का प्रतीक”

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि “अमेरिकी झंडा सिर्फ कपड़े का टुकड़ा नहीं बल्कि करोड़ों नागरिकों की शपथ, त्याग और गौरव का प्रतीक है।” उन्होंने कहा कि झंडे का अपमान किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ट्रंप का यह बयान देश में बढ़ती विरोध-प्रदर्शन की घटनाओं के बीच आया है, जहां कई बार प्रदर्शनकारियों द्वारा झंडा जलाकर विरोध दर्ज कराया गया था।

क्या कहता है अमेरिकी संविधान?

अमेरिका में लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि झंडा जलाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है या नहीं। वर्तमान में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इसे ‘फ्री स्पीच’ का हिस्सा माना है, लेकिन ट्रंप इस फैसले से असहमत रहे हैं। उनके अनुसार, “अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब यह नहीं कि राष्ट्र के गौरव का अपमान किया जाए।”

विपक्ष ने जताई आपत्ति

विपक्षी दलों और मानवाधिकार संगठनों ने ट्रंप के इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि यह फैसला संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों के विपरीत है। कई संगठनों ने चेतावनी दी है कि यह कानून लागू हुआ तो इसे न्यायिक चुनौती दी जाएगी।

सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया

ट्रंप के इस ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। समर्थक इस फैसले को देशभक्ति का प्रतीक बता रहे हैं जबकि विरोधी इसे नागरिक स्वतंत्रता पर हमला कह रहे हैं। ट्विटर और फेसबुक पर #FlagRespectAct और #FreedomOfSpeech जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

ट्रंप का यह नया कानून अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर विभाजन की रेखा खींचता नजर आ रहा है। जहां एक ओर यह कदम राष्ट्रभक्ति को मजबूत करने की दिशा में माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर अंकुश के रूप में भी देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि अमेरिकी कांग्रेस इस प्रस्ताव को कितना समर्थन देती है और क्या यह वास्तव में कानून बन पाता है या नहीं।

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