Bhilai Murder Mystery
Bhilai Murder Mystery : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ सुपेला थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्मृति नगर चौकी पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में महीनों से फरार चल रही महिला आरोपी सोनिया गोस्वामी को धर दबोचा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में राजनीति और अपराध का ऐसा गठजोड़ सामने आया है जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। पुलिस प्रशासन पिछले काफी समय से सोनिया की तलाश में जुटी थी, क्योंकि इस केस का दूसरा मुख्य आरोपी और रसूखदार कांग्रेस नेता राजू पाल पहले ही सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। सोनिया की गिरफ्तारी के बाद अब पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है।
घटना की जड़ें हाउसिंग बोर्ड कोहका निवासी मोहन रामटेके (42) की संदिग्ध मौत से जुड़ी हैं। 28 मार्च 2026 की मनहूस सुबह मोहन अपने घर में मृत अवस्था में पाए गए थे। शुरुआत में इसे एक सामान्य मर्ग का मामला मानकर जांच शुरू की गई थी, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने तहकीकात की परतें खोलीं, एक खौफनाक सच सामने आया। मृतक के करीबी सृजन कन्हैया पांडेय ने पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी दी कि कुछ लोग मोहन से लगातार 1 लाख रुपये की अवैध मांग कर रहे थे। पैसे न देने की स्थिति में आरोपी न केवल फोन पर धमकियां दे रहे थे, बल्कि बार-बार घर पहुंचकर मोहन को सरेआम जलील भी कर रहे थे।
मोहन रामटेके की आत्महत्या के बाद पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ था, जो इस पूरे केस का सबसे बड़ा साक्ष्य बना। इस पत्र में स्पष्ट रूप से कांग्रेस नेता राजू पाल और सोनिया गोस्वामी के नामों का उल्लेख किया गया था। सुसाइड नोट के अनुसार, ये दोनों आरोपी मोहन पर पैसों के लिए इस कदर दबाव बना रहे थे कि उसका जीना मुहाल हो गया था। लगातार मिल रही धमकियों और समाज में बदनामी के डर से मोहन गहरे तनाव (डिप्रेशन) में चला गया था। अंततः, मानसिक प्रताड़ना की पराकाष्ठा होने पर उसने मौत को गले लगाना बेहतर समझा।
केस दर्ज होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राजू पाल को तो गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन सोनिया गोस्वामी पुलिस को चकमा देकर फरार होने में कामयाब रही थी। पुलिस की टीमें लगातार उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं। 6 अप्रैल 2026 को मुखबिर से सटीक सूचना मिली कि सोनिया अपने पैतृक गांव जेवरासिरसा में छिपी हुई है। बिना वक्त गंवाए स्मृति नगर चौकी की टीम ने घेराबंदी की और उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय वह भागने की फिराक में थी, लेकिन महिला पुलिसकर्मियों की मुस्तैदी ने उसे सफल नहीं होने दिया।
गिरफ्तारी के बाद सोनिया गोस्वामी को सुपेला थाने लाया गया, जहाँ उससे कड़ी पूछताछ की गई। पुलिस ने अवैध वसूली और आत्महत्या के लिए उकसाने की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। दुर्ग पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो या किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो, कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता। मोहन रामटेके के परिवार ने पुलिस की इस तत्परता की सराहना की है।
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