Durg Guest Teachers Protest: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में प्रदेशभर से पहुंचे हजारों अतिथि शिक्षक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। 1 जुलाई से जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय, पटेल चौक के सामने अनिश्चितकालीन धरना जारी है। आंदोलन में शामिल शिक्षक नियमितीकरण, संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य के बदले समान वेतन और स्थायी रोजगार जैसी प्रमुख मांगों को लेकर सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से वे सरकारी स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।

शिक्षा मंत्री के निवास की ओर बढ़े प्रदर्शनकारी
सोमवार को आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया, जब बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित सरकारी निवास का घेराव करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को सीधे मंत्री तक पहुंचाना चाहते थे। हालांकि, मंत्री निवास तक पहुंचने से पहले ही पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इससे मौके पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई धक्का-मुक्की
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद आंदोलनकारी शिक्षक बैरिकेड पार करने का प्रयास करने लगे। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। हालांकि, प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए किसी बड़े विवाद को होने से रोक दिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में शिक्षक सड़क पर ही बैठ गए और वहीं धरना जारी रखा। आंदोलनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की अपील की।
पोस्टरों के जरिए सरकार तक पहुंचाया संदेश
धरना स्थल पर मौजूद शिक्षकों के हाथों में बैनर, पोस्टर और तख्तियां दिखाई दीं। कई पोस्टरों में उन अतिथि शिक्षकों की तस्वीरें भी लगाई गई थीं, जिनके बारे में आंदोलनकारियों का दावा है कि सेवा के दौरान उनका निधन हो गया। प्रदर्शनकारियों ने इन तस्वीरों के माध्यम से सरकार का ध्यान अतिथि शिक्षकों की परिस्थितियों और उनके भविष्य की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा और सम्मान नहीं मिला है।
नियमितीकरण और समान वेतन की प्रमुख मांग
आंदोलनकारी शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, लेकिन आज भी अस्थायी व्यवस्था के तहत काम करने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि उन्हें न नियमित नियुक्ति मिली, न संविलियन का लाभ और न ही समान कार्य के अनुरूप वेतन। शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के नाम खून से पत्र लिखकर भी अपनी मांगों से अवगत कराया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
विधानसभा सत्र के बाद भी नहीं हुई चर्चा
आंदोलनकारियों के अनुसार प्रशासनिक अधिकारियों, तहसीलदार और शिक्षा मंत्री के प्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया था कि विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद उनकी मांगों पर चर्चा के लिए बुलाया जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि सत्र समाप्त हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक किसी स्तर पर औपचारिक बातचीत नहीं हुई। अतिथि शिक्षक धर्मेंद्र वैष्णव ने कहा कि वे पिछले 11 वर्षों से शोषण का सामना कर रहे हैं और अब समान कार्य के बदले समान वेतन तथा संविलियन की मांग से पीछे नहीं हटेंगे।
आंदोलन जारी रहने से पढ़ाई पर पड़ रहा असर
प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि उनका आंदोलन पिछले 20 दिनों से लगातार जारी है और यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक धरने पर होने के कारण कई सरकारी स्कूलों में पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा।
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