SIR Exercise: आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा की है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बिहार में SIR का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है और अब इसका दूसरा चरण शुरू किया जा रहा है।
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार में लगभग साढ़े सात करोड़ वोटरों ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया। करीब 90 हजार बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने मिलकर मतदाता सूची को “शुद्ध” बनाने का काम किया। अब यही प्रक्रिया दूसरे चरण में 12 राज्यों में चलाई जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में जिन राज्यों को शामिल किया जा सकता है उनमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे चुनावी राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में अगले छह महीनों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।
चुनाव आयोग ने बताया कि BLO और AERO की ट्रेनिंग मंगलवार से शुरू होगी। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे अपने बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की नियुक्ति जल्द करें ताकि मतदाता सूची का पुनरीक्षण सुचारू रूप से हो सके। BLO मतदाताओं के घर तीन बार जाएंगे और ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
SIR चुनाव आयोग की एक नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध किया जाता है।
इसमें—
18 वर्ष से अधिक उम्र के नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है,
जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं,
नाम, पता या अन्य त्रुटियों को सुधारा जाता है।
BLO घर-घर जाकर जानकारी जुटाते हैं और राजनीतिक दलों के एजेंट भी इस कार्य में सहयोग करते हैं।
देश में तेजी से शहरीकरण और पलायन के कारण मतदाता सूचियों में दोहराव और अशुद्धियां बढ़ी हैं। कुछ मामलों में फर्जी नाम या डुप्लीकेट वोटर भी पाए गए हैं। SIR के जरिए आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई पात्र नागरिक छूटे नहीं और कोई अपात्र व्यक्ति शामिल न हो।
SIR प्रक्रिया के बाद तैयार की गई मतदाता सूची को कट-ऑफ डेट के रूप में माना जाता है। बिहार में 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाकर पहला चरण पूरा किया गया था, और अब उसी मॉडल को अन्य राज्यों में लागू किया जा रहा है।
चुनाव आयोग का यह कदम आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। पारदर्शी और अद्यतन मतदाता सूची से न केवल चुनाव प्रक्रिया मजबूत होगी, बल्कि लोकतंत्र में लोगों का विश्वास भी और गहरा होगा।
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