पश्चिम बंगाल

ED Kolkata Action: श्री गणेश ज्वेलरी हाउस बैंक धोखाधड़ी मामला,  ईडी ने प्रत्युष सुरेका को किया गिरफ्तार

ED Kolkata Action: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कोलकाता इकाई ने बैंकिंग क्षेत्र के एक बड़े धोखाधड़ी मामले में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। ईडी ने श्री गणेश ज्वेलरी हाउस (SGJHIL) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रत्युष कुमार सुरेका को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। सुरेका पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी और बैंक ऋण के गबन में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है। इस गिरफ्तारी से राज्य के कॉरपोरेट जगत में हड़कंप मच गया है।

सीबीआई की एफआईआर से शुरू हुई जांच: 25 बैंकों के कंसोर्टियम को लगा चूना

इस मामले की जड़ें साल 2016 में दर्ज एक प्राथमिकी में हैं। सीबीआई ने 12 जुलाई 2016 को श्री गणेश ज्वेलरी हाउस और उसके प्रमोटरों के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप है कि कंपनी ने देश के 25 प्रमुख बैंकों के समूह (कंसोर्टियम) के साथ मिलकर कुल 2,672 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धोखाधड़ी की थी। सीबीआई की इसी एफआईआर को आधार बनाकर ईडी ने अपनी जांच शुरू की, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग के चौंकाने वाले सबूत सामने आए।

फंड का डायवर्जन: ज्वेलरी के पैसे से सोलर पावर प्रोजेक्ट में निवेश

ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ कि साल 2011-12 के दौरान, कंपनी ने आभूषण कारोबार के विस्तार के नाम पर बैंकों से लोन लिया था। हालांकि, उस पैसे का उपयोग ज्वेलरी व्यवसाय में करने के बजाय, उसे अवैध रूप से सोलर पावर प्रोजेक्ट्स में डायवर्ट कर दिया गया। इस पूरी साजिश में ‘मेसर्स एलेक्स एस्ट्रल पावर प्राइवेट लिमिटेड’ और उसकी सहयोगी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। प्रत्युष कुमार सुरेका को अप्रैल 2012 में इस कंपनी का जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया था, जहाँ से हेराफेरी का खेल शुरू हुआ।

संपत्तियों की वास्तविक कीमत छिपाई: 400 करोड़ का प्रोजेक्ट कौड़ियों में ट्रांसफर

जांच के अनुसार, सोलर पावर प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 400 करोड़ रुपये थी, जिसमें 120 करोड़ रुपये की इक्विटी और 280 करोड़ रुपये का बैंक फाइनेंस शामिल था। सुरेका ने जटिल कॉरपोरेट ढांचे और ‘शेम इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट’ का सहारा लेकर इस बेशकीमती एसेट को फर्जी तरीके से 20 करोड़ रुपये से भी कम कीमत पर अपनी नियंत्रित कंपनियों को ट्रांसफर कर दिया। यह एक ‘रिलेटेड पार्टी डील’ थी, जिसका एकमात्र उद्देश्य बैंकों को नुकसान पहुँचाना और संपत्तियों की असली वैल्यू को छिपाना था।

जटिल कॉरपोरेट ढांचा और फर्जीवाड़ा: डमी डायरेक्टर्स के जरिए हेरफेर

ईडी के अधिकारियों ने पाया कि प्रत्युष सुरेका की अपनी नेटवर्थ काफी कम थी, लेकिन इसके बावजूद वे सैकड़ों करोड़ की संपत्तियों को नियंत्रित कर रहे थे। उन्होंने एंट्री ऑपरेटर्स, फर्जी दस्तावेजों और सर्कुलर ट्रांजैक्शन्स के माध्यम से काले धन को सफेद (लेयरिंग) किया। जांच में यह भी पता चला कि सुरेका ने फर्जी बोर्ड प्रस्ताव तैयार किए, समझौतों को बैकडेट किया और डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग किया। यहाँ तक कि डमी डायरेक्टर्स की नियुक्ति करके फर्जी रिकॉर्ड भी तैयार किए गए थे।

लुकआउट सर्कुलर और एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी: थाईलैंड भागने की थी फिराक

ईडी के मुताबिक, प्रत्युष सुरेका जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने देश छोड़कर भागने की भी योजना बनाई थी। 5 जनवरी 2026 को कोलकाता एयरपोर्ट पर उन्हें उस समय रोका गया जब वे थाईलैंड जाने की कोशिश कर रहे थे। उनके खिलाफ जारी ‘लुकआउट सर्कुलर’ (LOC) के आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया। गवाहों को प्रभावित करने और फरार होने की आशंका को देखते हुए अंततः उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

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