Anil Ambani ED News: कारोबारी अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (Reliance Infra) पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। FEMA (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) के तहत विदेशों में अवैध धन भेजने के संदेह में ईडी ने मुंबई और इंदौर स्थित 6 परिसरों की तलाशी ली है। यह छापेमारी ऐसे वक्त पर हुई है जब अनिल अंबानी पहले से ही 17,000 करोड़ रुपये से अधिक के ग्रुप लोन हेरफेर और बैंक लोन धोखाधड़ी के आरोपों का सामना कर रहे हैं।

10 घंटे तक चली थी पूछताछ
इससे पहले अगस्त 2025 में अनिल अंबानी से दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय में करीब 10 घंटे तक पूछताछ की गई थी। यह पूछताछ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत की गई थी, जिसमें अंबानी से रिलायंस ग्रुप की कंपनियों द्वारा लिए गए लोन, उनके इस्तेमाल और विदेशी लेनदेन को लेकर सवाल किए गए थे।

सूत्रों के अनुसार, अंबानी ने सभी आरोपों से इनकार किया और बताया कि कंपनी के वित्तीय निर्णय वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लिए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि सभी जानकारियां नियामक संस्थाओं को समय पर दी गई थीं।
68 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी का मामला भी जुड़ा
ईडी की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। ओडिशा की एक कंपनी के एमडी पार्थ सारथी बिस्वाल को 68 करोड़ रुपये की फर्जी बैंक गारंटी जारी करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह गारंटी कथित तौर पर अनिल अंबानी ग्रुप की एक कंपनी के लिए दी गई थी। जांच एजेंसी का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क एक सुनियोजित वित्तीय अनियमितता का हिस्सा हो सकता है, जिसके जरिए लोन की रकम का दुरुपयोग किया गया।
ED की जांच का दायरा बढ़ा
प्रवर्तन निदेशालय अब रिलायंस ग्रुप की उन सभी कंपनियों की जांच कर रही है जो पिछले एक दशक में बैंक ऋण, विदेशी निवेश, और फंड ट्रांसफर से संबंधित विवादों में रही हैं। इसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा रिलायंस कैपिटल, रिलायंस पावर जैसी अन्य फर्मों की भी जांच की जा रही है। ईडी सूत्रों के मुताबिक, जांच में अब तक सामने आए सबूत यह संकेत दे रहे हैं कि कंपनी की फाइनेंशियल रिपोर्टिंग और लोन उपयोग में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं।
क्या आगे हो सकती हैं गिरफ्तारियां?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईडी को तलाशी और पूछताछ से ठोस सबूत मिलते हैं, तो आने वाले हफ्तों में कुछ बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी भी हो सकती है। हालांकि, अनिल अंबानी को अब तक किसी केस में आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया है, लेकिन उनकी संलिप्तता को लेकर जांच गहराती जा रही है।
अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर पर ईडी की यह कार्रवाई न सिर्फ वित्तीय क्षेत्र के लिए बल्कि पूरे कॉर्पोरेट जगत के लिए एक चेतावनी है। बड़े कॉर्पोरेट घरानों पर बढ़ती निगरानी यह साफ दर्शाती है कि वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही अब सरकार और नियामक एजेंसियों की सर्वोच्च प्राथमिकता बन चुकी है।











