SIR News : देश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को लेकर एक अहम बदलाव करने का फैसला किया है। गुरुवार को सामने आई जानकारी के मुताबिक, अब राजनीतिक दलों को मशीन रीडेबल पीडीएफ प्रारूप में मतदाता सूची उपलब्ध कराई जाएगी। इस फैसले को विपक्ष अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रहा है। वहीं, आयोग की ओर से मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को लेकर भी घोषणा की गई है।
मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट से क्या बदलेगा?
अब तक राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाने वाली मतदाता सूची को लेकर विपक्ष सवाल उठाता रहा है। उसका कहना है कि सूची इमेज आधारित पीडीएफ प्रारूप में होने के कारण उसमें किसी मतदाता का नाम या अन्य जानकारी आसानी से सर्च नहीं की जा सकती। इसके अलावा, डेटा को कॉपी-पेस्ट करना और बड़े पैमाने पर उसका विश्लेषण करना भी मुश्किल होता है। मशीन रीडेबल प्रारूप मिलने से राजनीतिक दलों के लिए मतदाता सूची में उपलब्ध जानकारियों को खोजना और उनका व्यवस्थित विश्लेषण करना आसान हो सकता है।
राहुल गांधी और विपक्ष ने उठाए थे सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने चुनाव आयोग से मशीन रीडेबल मतदाता सूची उपलब्ध कराने की मांग की थी। विपक्ष का आरोप रहा है कि मौजूदा प्रारूप में मतदाता सूची की जांच करना कठिन होता है, जिससे संभावित गड़बड़ियों की पहचान करने में परेशानी आती है। हालांकि, मतदाता सूची में गड़बड़ी या फर्जी मतदाताओं से जुड़े आरोपों को संबंधित प्रमाणों के आधार पर ही परखा जा सकता है। मशीन रीडेबल सूची उपलब्ध कराने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब SIR की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता पर राजनीतिक चर्चा तेज है।
2018 में भी उठा था मशीन रीडेबल सूची का मुद्दा
मतदाता सूची को मशीन रीडेबल प्रारूप में उपलब्ध कराने का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 2018 में कांग्रेस ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। पार्टी की मांग थी कि राजनीतिक दलों को ऐसी मतदाता सूची दी जाए, जिसमें नाम और अन्य विवरणों को आसानी से खोजा जा सके। उस समय चुनाव आयोग ने मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए इस तरह की सूची उपलब्ध कराने पर आपत्ति जताई थी। अब रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग ने अपने पुराने रुख में बदलाव करने का निर्णय लिया है। हालांकि, नई व्यवस्था की विस्तृत शर्तों और लागू होने की समयसीमा की पुष्टि आधिकारिक निर्देशों से की जानी चाहिए।
17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की तैयारी
इस बीच चुनाव आयोग ने नवंबर से 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) शुरू करने की घोषणा भी की है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य नए पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना और छूटे हुए मतदाताओं को पंजीकरण का अवसर देना है। मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया में पात्र नागरिकों को निर्धारित नियमों के अनुसार आवेदन करने का अवसर मिल सकता है।
विपक्ष ने फैसले को बताया अपनी मांग की जीत
मशीन रीडेबल मतदाता सूची और आगामी मतदाता पुनरीक्षण की घोषणाओं को विपक्ष अपनी मांगों से जोड़कर देख रहा है। राजनीतिक दलों के लिए अब प्रमुख सवाल यह होगा कि नई सूची किस प्रारूप में उपलब्ध कराई जाएगी और उसके जरिए मतदाता विवरणों की जांच कितनी आसानी से हो सकेगी। दूसरी ओर, SIR और SSR की प्रक्रियाओं में पात्र मतदाताओं का नाम शामिल करना तथा सूची की सटीकता बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा। आयोग के विस्तृत दिशा-निर्देश सामने आने के बाद इस बदलाव के व्यावहारिक असर को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
Read More : Nanded Road Accident: माहुर के केरोली घाट में दर्दनाक हादसा, तीन श्रद्धालुओं की मौत