Electoral Trust Donation 2025
Electoral Trust Donation 2025: सुप्रीम कोर्ट द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक घोषित कर बंद किए जाने के बाद यह माना जा रहा था कि राजनीतिक दलों के चंदे में कमी आएगी। हालांकि, ताज़ा आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में ‘इलेक्टोरल ट्रस्ट’ के माध्यम से राजनीतिक दलों को मिलने वाले डोनेशन में जबरदस्त उछाल देखा गया है। चुनाव आयोग के पास जमा की गई रिपोर्ट के अनुसार, इस साल राजनीतिक दलों को कुल 3811 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष (2023-24) के 1218 करोड़ रुपये के मुकाबले लगभग 200 प्रतिशत अधिक है। यह स्पष्ट करता है कि बॉन्ड बंद होने के बावजूद कॉरपोरेट जगत और दानदाताओं ने अन्य माध्यमों से दिल खोलकर चंदा दिया है।
इलेक्टोरल ट्रस्ट को प्राप्त हुए कुल चंदे में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सबसे बड़े लाभार्थी के रूप में उभरी है। कुल 3811 करोड़ रुपये में से अकेले 3112 करोड़ रुपये बीजेपी की झोली में गए हैं। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो कुल फंड का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा सत्ताधारी पार्टी को मिला है। इसके विपरीत, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को केवल 200 करोड़ रुपये (लगभग 8 प्रतिशत) ही प्राप्त हुए हैं। अन्य सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों को मिलाकर शेष 10 प्रतिशत यानी करीब 400 करोड़ रुपये का चंदा मिला। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि चंदे के मामले में बीजेपी और अन्य दलों के बीच एक बड़ी खाई मौजूद है।
बीजेपी को सबसे अधिक डोनेशन ‘प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट’ (Prudent Electoral Trust) के जरिए प्राप्त हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस अकेले ट्रस्ट ने 2668 करोड़ रुपये इकट्ठा किए, जिसमें से 2180.07 करोड़ रुपये बीजेपी को दिए गए। इस ट्रस्ट को दान देने वाली कंपनियों की सूची में देश के दिग्गज कॉरपोरेट नाम शामिल हैं। जिंदल स्टील एंड पावर, मेघा इंजीनियरिंग, भारती एयरटेल, अरविंद फार्मा और टोरेंट फार्मास्युटिकल्स जैसी बड़ी कंपनियों ने इस ट्रस्ट के माध्यम से करोड़ों का फंड दिया है। हालांकि, इस ट्रस्ट ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आप और टीडीपी जैसी पार्टियों को भी कुछ हिस्सा दिया, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा बीजेपी के खाते में ही गया।
| पार्टी | प्राप्त चंदा (₹ करोड़) | प्रतिशत हिस्सा |
|---|---|---|
| बीजेपी (BJP) | 3,142.65 | ~82% |
| कांग्रेस (INC) | 299 | ~8% |
| अन्य दल | 400 | ~10% |
| कुल | 3,811 | 100% |
चंदा वितरण की सूची में ‘प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट’ (Progressive Electoral Trust) दूसरे स्थान पर रहा। इस ट्रस्ट को कुल 917 करोड़ रुपये का डोनेशन मिला, जिसमें से 914.97 करोड़ रुपये विभिन्न राजनीतिक दलों को वितरित किए गए। इस राशि का भी 80.82 प्रतिशत हिस्सा बीजेपी के अकाउंट में जमा हुआ। इस ट्रस्ट को मुख्य रूप से टाटा ग्रुप की कंपनियों जैसे टाटा संस, टीसीएस (TCS), टाटा स्टील, टाटा मोटर्स और टाटा पावर द्वारा डोनेट किया गया था। यह आंकड़े बताते हैं कि देश के बड़े औद्योगिक घराने अभी भी राजनीतिक चंदे के लिए ट्रस्ट को एक पारदर्शी माध्यम के रूप में देख रहे हैं।
वर्ष 2023-24 में बीजेपी को कुल 3,967.14 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें से 43 प्रतिशत (1,685.62 करोड़) इलेक्टोरल बॉन्ड से आए थे। फरवरी 2024 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह व्यवस्था खत्म हो गई। अब कोई भी व्यक्ति या संस्था चेक, डिमांड ड्राफ्ट, UPI या बैंक ट्रांसफर के जरिए दान दे सकती है। नई व्यवस्था की खास बात यह है कि अब राजनीतिक दलों को प्रत्येक डोनेशन की जानकारी चुनाव आयोग को देनी अनिवार्य है। हालांकि बॉन्ड खत्म होने से गुमनामी खत्म हुई है, लेकिन चंदे की कुल राशि में बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि चुनावी राजनीति में धनबल का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
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