बिहार

Bhojpur DM Fake Call : बिहार का ‘नटवरलाल’ गिरफ्तार, डीएम को ईडी निदेशक बनकर धमकाना पड़ा भारी

Bhojpur DM Fake Call : बिहार के भोजपुर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि साइबर सुरक्षा और हाई-प्रोफाइल जालसाजी के बढ़ते खतरों को भी उजागर किया है। एक बेहद शातिर जालसाज ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) का निदेशक बताकर भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया पर विभागीय दबाव बनाने की धृष्टता की। हालांकि, इस बार अपराधी का पाला एक सतर्क अधिकारी से पड़ा था। जिलाधिकारी की सूझबूझ और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इस बड़ी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। यह घटना दिखाती है कि कैसे अपराधी अब सीधे शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाने से भी नहीं हिचक रहे हैं।

एक व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुआ धोखाधड़ी का ताना-बाना

पूरा मामला 27 अप्रैल 2026 का है, जब भोजपुर डीएम तनय सुल्तानिया के सरकारी मोबाइल नंबर पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने पूरे आत्मविश्वास के साथ खुद को दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय का मुख्य निदेशक बताया। उसने कुछ विशिष्ट विभागीय फाइलों और मामलों को लेकर जिलाधिकारी पर अनुचित दबाव बनाने का प्रयास किया। शुरुआत में कॉल करने वाले की भाषा और आधिकारिक लहजे को देखते हुए इसे गंभीरता से लिया गया, लेकिन बातचीत जैसे-जैसे आगे बढ़ी, डीएम को उसकी बातों और मांगों पर संदेह होने लगा। जिलाधिकारी ने बिना समय गंवाए तत्काल जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इसकी भनक दे दी, जो इस केस का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

पटना के बुद्धा कॉलोनी से हुई गिरफ्तारी: 12 साल का काला इतिहास

जिलाधिकारी की शिकायत पर पुलिस महकमा तुरंत सक्रिय हुआ। 28 अप्रैल को भोजपुर के नवादा थाना में इस बाबत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई। भोजपुर एसपी के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच शुरू की। जालसाज बार-बार अपना ठिकाना बदल रहा था, लेकिन पुलिस ने आखिरकार उसे पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र से धर दबोचा। गिरफ्तार आरोपी की पहचान पटना के बुद्धा कॉलोनी निवासी अभिषेक भोपल्का उर्फ अभिषेक अग्रवाल के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से 2 लाख 61 हजार रुपये नकद और वह मोबाइल फोन बरामद किया है, जिसका इस्तेमाल वह अधिकारियों को धमकाने के लिए करता था। जांच में खुलासा हुआ कि अभिषेक पिछले 12 सालों से जालसाजी के इसी ‘धंधे’ में लिप्त है।

फर्जी पहचान का मायाजाल: कभी जज तो कभी पीए

अभिषेक अग्रवाल कोई साधारण अपराधी नहीं है, बल्कि वह वेश बदलने और फर्जी पहचान बनाने में माहिर है। वह परिस्थितियों के अनुसार अपनी प्रोफाइल तैयार करता था। कभी वह खुद को किसी बड़े मंत्री का निजी सहायक (PA) बताता, तो कभी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश। वह फर्जी सिम कार्डों का उपयोग कर बड़े अधिकारियों को फोन करता और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर अपना काम निकलवाता था। वह इतना शातिर था कि सामने वाले व्यक्ति की कमजोरी भांपकर उसे सरकारी आदेशों का हवाला देकर डराता था। पुलिस के अनुसार, आरोपी का यह खेल काफी पुराना है और वह इस कला में पारंगत हो चुका है।

पूर्व डीजीपी को भी बना चुका है निशाना: न्यायाधीश बनकर किया था फोन

आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड खंगालने पर पुलिस के होश उड़ गए। वर्ष 2022 में इसी जालसाज ने खुद को पटना उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बताकर तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (DGP) को फोन किया था। उस समय उसने एक विशेष अधिकारी के पक्ष में पैरवी करने और कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया था। यह तथ्य प्रमाणित करता है कि आरोपी के हौसले इतने बुलंद थे कि वह राज्य के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी तक को मूर्ख बनाने की कोशिश कर चुका था। वह केवल आम जनता को ही नहीं ठगता था, बल्कि सिस्टम के सबसे शक्तिशाली पदों का मुखौटा पहनकर व्यवस्था को चुनौती देता आ रहा था।

सोशल मीडिया और तस्वीरों के जरिए साख बनाने की रणनीति

अभिषेक केवल फोन कॉल्स तक सीमित नहीं रहता था, वह डिजिटल दौर के हथकंडों का भी भरपूर उपयोग करता था। वह राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक समारोहों में बड़े नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तस्वीरें खिंचवाता था। इन तस्वीरों को वह अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल और व्हाट्सएप पर साझा करता था ताकि लोग उसे रसूखदार समझें। भोजपुर डीएम को कॉल करते समय भी उसने अपने व्हाट्सएप प्रोफाइल पर एक वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी की फोटो लगा रखी थी, ताकि उसकी कॉल को विश्वसनीय माना जाए। यह उसकी मनोवैज्ञानिक रणनीति का हिस्सा था जिसके जरिए वह अधिकारियों को भ्रमित करता था।

तिहाड़ जेल की हवा खा चुका है शातिर अभिषेक

पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि अभिषेक अग्रवाल वर्ष 2014 से लगातार अपराध की दुनिया में सक्रिय है। वह कई बार जेल जा चुका है, लेकिन बाहर आते ही फिर से उसी काम में जुट जाता है। वर्ष 2018 में उसे दिल्ली की हाई-सिक्योरिटी तिहाड़ जेल भी भेजा गया था। बार-बार गिरफ्तारी और जेल जाने के बावजूद उसके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या उसके पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है या वह अकेले ही इन वारदातों को अंजाम देता था। वर्तमान में उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और उससे कड़ी पूछताछ जारी है।

गंभीर धाराओं में मुकदमा और प्रशासनिक सतर्कता की जरूरत

नवादा थाना में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उस पर धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली और सरकारी पद का दुरुपयोग करने जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। भोजपुर एसपी राज ने बताया कि पुलिस उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की कोशिश कर रही है। यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अधिकारियों को सलाह दी गई है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाले ‘हाई-प्रोफाइल’ कॉल्स को बिना पुष्टि किए स्वीकार न करें। समाज के लिए भी यह सबक है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर तस्वीर या दावा सच्चा नहीं होता। तकनीकी रूप से उन्नत होते अपराधियों से निपटने के लिए अब पुलिस को भी और अधिक स्मार्ट होने की आवश्यकता है।

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