Fake Tender Scam: छत्तीसगढ़ के आदिवासी विकास विभाग में बड़ा प्रशासनिक झटका सामने आया है। करोड़ों के फर्जी टेंडर घोटाले में डिप्टी कमिश्नर डॉ. आनंदजी सिंह को निलंबित कर दिया गया है। विभाग ने बुधवार देर शाम यह सस्पेंशन आदेश जारी किया, जिससे सरकारी महकमे में हलचल मच गई है।

क्या है पूरा मामला?
डॉ. आनंदजी सिंह, वर्तमान में आदिवासी विकास विभाग रायपुर में पदस्थ थे। लेकिन जांच में सामने आया कि जब वे दंतेवाड़ा में सहायक आयुक्त के पद पर कार्यरत थे, उस दौरान वर्ष 2021 से 2024 के बीच डिस्टिक मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड से करोड़ों के टेंडर फर्जी तरीके से पास कराए गए।

जिलाधिकारी द्वारा करवाई गई जांच में खुलासा हुआ कि कुल 45 टेंडर फर्जी तरीके से जारी किए गए थे। यह पूरा घोटाला डॉ. आनंदजी सिंह और तत्कालीन सहायक आयुक्त केएस मेसराम के कार्यकाल में हुआ था।
एफआईआर और गिरफ्तारी
जांच रिपोर्ट के आधार पर दंतेवाड़ा पुलिस ने दोनों पूर्व सहायक आयुक्तों और विभाग के एक बाबू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इसके बाद पुलिस ने दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि विभागीय बाबू अब तक फरार है। उसकी तलाश अभी भी जारी है।
विभागीय कार्रवाई में निलंबन
घटना के सामने आने और कानूनी कार्रवाई शुरू होने के करीब 20 दिन बाद विभाग ने डॉ. आनंदजी सिंह को निलंबित करने का निर्णय लिया। सस्पेंशन आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में डॉ. सिंह का कार्यस्थल आयुक्त, आदिम जाति विभाग रायपुर रखा गया है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) प्रदान किया जाएगा। वहीं, मामले में शामिल केएस मेसराम अब रिटायर हो चुके हैं, इसलिए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई सीमित हो सकती है।
प्रशासन की सख्ती, सख्त संदेश
सरकार और विभाग की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत गया है कि भ्रष्टाचार या वित्तीय अनियमितताओं को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन, पुलिस और विभाग की सतर्कता सराहनीय रही है।
डिप्टी कमिश्नर स्तर के अधिकारी पर कार्रवाई से आदिवासी विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। अब देखना यह होगा कि फरार बाबू की गिरफ्तारी कब होती है और कोर्ट में मामला किस दिशा में जाता है। लेकिन इतना तय है कि इस सख्त कदम ने प्रशासनिक जगत में हड़कंप मचा दिया है।
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