Fever Myth: बुखार होने पर दवा लेने के कुछ समय बाद कई लोगों को तेज पसीना आने लगता है। इसके बाद शरीर ठंडा महसूस होता है और तापमान भी सामान्य होने लगता है। इसी अनुभव के कारण लोगों के मन में यह धारणा बन जाती है कि पसीना निकलने से बुखार उतरता है और शरीर से संक्रमण बाहर निकल जाता है। कई लोग तो बुखार में जानबूझकर कंबल ओढ़कर या ज्यादा गर्म कपड़े पहनकर पसीना निकालने की कोशिश करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा करना बुखार या संक्रमण को जल्दी ठीक करने का सही तरीका नहीं है।
जानबूझकर पसीना निकालना क्यों नहीं है सही?
दिल्ली के पीएसआरआई अस्पताल की पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर नीतू जैन के अनुसार, बुखार में जानबूझकर पसीना बहाने की कोशिश संक्रमण से लड़ने का प्रभावी तरीका नहीं है। बुखार के दौरान शरीर का तापमान पहले से बढ़ा हुआ रहता है। ऐसे में अतिरिक्त कपड़े पहनना या कंबल में खुद को ढककर गर्मी पैदा करना शरीर का तापमान और बढ़ा सकता है। इससे आराम मिलने के बजाय परेशानी बढ़ सकती है।
ज्यादा पसीने से बढ़ सकता है डिहाइड्रेशन
बुखार के दौरान शरीर से पानी की कमी पहले ही हो सकती है। ऐसे में जानबूझकर अधिक पसीना निकालने पर डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। शरीर में पानी और तरल पदार्थ की कमी होने से कमजोरी, चक्कर, थकान और बेचैनी महसूस हो सकती है। यदि व्यक्ति लंबे समय तक अत्यधिक गर्म वातावरण में रहता है, तो शरीर का तापमान भी जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है। इसलिए बुखार कम करने के लिए कृत्रिम तरीके से पसीना निकालना उचित नहीं माना जाता।
बुखार उतरते समय क्यों आता है पसीना?
बुखार कम होने के दौरान पसीना आना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया हो सकती है। जब शरीर का तापमान सामान्य स्तर पर लौटने लगता है, तो शरीर अतिरिक्त गर्मी बाहर निकालने के लिए पसीना पैदा कर सकता है। इस वजह से व्यक्ति को अचानक अधिक पसीना आने और फिर शरीर ठंडा महसूस होने का अनुभव होता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि संक्रमण पसीने के जरिए शरीर से बाहर निकल रहा है। पसीना बुखार कम होने का संकेत हो सकता है, लेकिन जानबूझकर पसीना बहाने से यह प्रक्रिया तेज नहीं होती।
बुखार होने पर किन बातों का रखें ध्यान?
बुखार में शरीर को अतिरिक्त गर्मी देने के बजाय पर्याप्त आराम करना चाहिए। पानी, सूप या अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ लेते रहना शरीर में पानी की कमी को रोकने में मदद कर सकता है। हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें तथा कमरे का तापमान भी सामान्य और सुविधाजनक रखें। यदि बुखार या शरीर के दर्द के कारण अधिक असहजता हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल जैसी दवा ली जा सकती है। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन करने से बचना चाहिए।
बुखार बीमारी नहीं, बल्कि एक लक्षण है
बुखार अपने आप में कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में मौजूद किसी समस्या या संक्रमण का एक लक्षण हो सकता है। इसलिए केवल तापमान कम करने के बजाय बुखार के मूल कारण को समझना भी जरूरी है। बहुत तेज बुखार कई दिनों तक बना रहे, लगातार बढ़ता जाए या स्थिति बिगड़ती महसूस हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
अगर बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, भ्रम की स्थिति, अत्यधिक कमजोरी, लगातार उल्टी, तेज सिरदर्द या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जल्द संपर्क करना बेहतर है। बुखार कम करने के लिए जबरन कंबल ओढ़कर पसीना निकालने के बजाय शरीर को आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और उचित चिकित्सकीय देखभाल देना अधिक जरूरी है।
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