Karnataka Student Elections : कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र चुनाव दोबारा शुरू करने का फैसला किया है। डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले शिक्षण संस्थानों में छात्र चुनाव कराए जाते थे, लेकिन बाद में इन्हें बंद कर दिया गया था। अब सरकार ने इन्हें फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है।
राजनीतिक पार्टियों और छात्र संगठनों को नहीं मिलेगी अनुमति
डिप्टी सीएम के मुताबिक, छात्र चुनावों में राजनीतिक दलों और राजनीतिक छात्र संगठनों को हिस्सा लेने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य छात्रों को स्वतंत्र रूप से अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर देना है। परमेश्वर ने स्पष्ट किया कि उम्मीदवार उसी कॉलेज या विश्वविद्यालय में आधिकारिक रूप से नामांकित छात्र होने चाहिए।
हर कॉलेज में तय होगा छात्र प्रतिनिधियों का ढांचा
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, प्रत्येक कॉलेज में एक स्टूडेंट प्रेसिडेंट और दो वाइस प्रेसिडेंट होंगे। इनमें एक पद महिला छात्र के लिए होगा। इसके अलावा एक जनरल सेक्रेटरी और दो जॉइंट सेक्रेटरी चुने जाएंगे, जिनमें एक महिला होगी। एग्जीक्यूटिव कमेटी में छह सदस्य होंगे और इनमें दो महिला सदस्य शामिल होंगी।
छात्र चुनाव में नहीं होगा किसी तरह का आरक्षण
जी. परमेश्वर ने कहा कि छात्र चुनावों में आरक्षण की व्यवस्था नहीं होगी। सरकार का तर्क है कि वह कॉलेज परिसरों में जाति आधारित चुनावी राजनीति को बढ़ावा नहीं देना चाहती। चुनाव की विस्तृत प्रक्रिया, नियम और तारीखों को लेकर फैसला आगे लिया जाएगा। सरकार ने फिलहाल चुनाव का ढांचा स्पष्ट किया है।
चुनाव कराना छात्रों की इच्छा पर निर्भर
डिप्टी सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र चुनाव कॉलेजों के लिए अनिवार्य नहीं होंगे। अगर किसी संस्थान के छात्र चुनाव नहीं कराना चाहते हैं तो वे ऐसा निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव कराने या नहीं कराने का अधिकार छात्रों का होगा और कॉलेज मैनेजमेंट अपनी तरफ से यह फैसला नहीं ले सकेगा।
कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया फैसला
परमेश्वर ने बताया कि मंत्री शरण प्रकाश पाटिल की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने कई कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का दौरा कर वहां की स्थिति का अध्ययन किया और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसी रिपोर्ट के आधार पर छात्र चुनाव बहाल करने का फैसला लिया गया। सरकार का मुख्य उद्देश्य छात्रों में नेतृत्व क्षमता विकसित करना है।
इसी साल से लागू होगी नई व्यवस्था
डिप्टी सीएम ने कहा कि छात्र चुनाव की नई व्यवस्था इसी साल से लागू की जाएगी। यह निर्णय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर लागू होगा, जबकि स्कूलों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया से विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था और नेतृत्व का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा।
BJYS में 7.36 लाख सदस्य हुए रजिस्टर
भारत जोड़ो युवा संघ (BJYS) को लेकर भी परमेश्वर ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तकनीकी समस्याओं के कारण इसकी सदस्यता प्रक्रिया कुछ समय के लिए रोकी गई थी। राज्य सरकार ने गांव-गांव में 10,000 BJYS यूथ क्लब स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। अब नए फॉर्म के जरिए सदस्यता प्रक्रिया फिर आगे बढ़ाई जाएगी। फिलहाल करीब 7.36 लाख सदस्य रजिस्टर हो चुके हैं, जबकि लक्ष्य 10 लाख सदस्यों का है।
यूथ क्लबों को हर साल मिलेगा वित्तीय सहयोग
परमेश्वर के अनुसार BJYS को आधिकारिक मान्यता दिलाने के लिए इसे रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज के तहत पंजीकृत कराया जाएगा। प्रत्येक एसोसिएशन में 15 सदस्यों का ढांचा होगा, जिसमें अध्यक्ष, सचिव और उपाध्यक्ष जैसे पद शामिल होंगे। सरकारी नोडल अधिकारी या प्रतिनिधि भी इसमें शामिल रहेगा। बैंक खाता संयुक्त रूप से संचालित होगा। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए सालाना करीब चार करोड़ रुपये दिए जाएंगे और प्रत्येक एसोसिएशन को 10 लाख रुपये तक मिलेंगे। इनका इस्तेमाल खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम, राष्ट्रीय दिवस समारोह और स्थानीय गतिविधियों में किया जा सकेगा।
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