अंतरराष्ट्रीय

Nepal Protest 2025: नेपाल में कवरेज कर रहे भारतीय पत्रकारों के लिए विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी, ‘सनसनी से बचें, जिम्मेदार रिपोर्टिंग करें’

Nepal Protest 2025: नेपाल में जारी राजनीतिक संकट और जन-आंदोलन के बीच भारतीय मीडिया की कवरेज को लेकर भारत सरकार ने महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने नेपाल में काम कर रहे भारतीय पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से कहा है कि वे संवेदनशील मुद्दों की रिपोर्टिंग में अतिरिक्त सतर्कता बरतें और तथ्य आधारित, निष्पक्ष कवरेज करें।

मंत्रालय की सलाह: “सनसनी और समर्थन से बचें”

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है “नेपाल में कार्यरत हमारे मीडिया प्रतिनिधियों को सलाह दी जाती है कि वे सनसनीखेज रिपोर्टिंग से बचें। किसी भी राजनीतिक या वैचारिक पक्ष का समर्थन न करें। रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत विचारों पर।” यह एडवाइजरी उस समय आई है जब नेपाल में सरकार विरोधी Gen-Z प्रदर्शन के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है और देश में राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है।

संवेदनशील मुद्दों से दूरी बनाए रखें

एडवाइजरी में खास तौर पर कहा गया है कि पत्रकार ‘Hindu Rashtra’, ‘Royalty’, या धार्मिक व वैचारिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर कोई व्यक्तिगत टिप्पणी या विश्लेषण न करें। विदेश मंत्रालय ने यह चेतावनी भी दी है कि इस तरह के विषयों पर गैर-जिम्मेदाराना कवरेज से भारत-विरोधी भावनाएं भड़क सकती हैं, जिससे भारत-नेपाल संबंधों को नुकसान हो सकता है।

भारत-नेपाल संबंधों पर असर की आशंका

नेपाल में भारत की छवि हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। कई बार नेपाल के आंतरिक मामलों में भारतीय मीडिया की भूमिका को लेकर विवाद उठते रहे हैं। हाल के विरोध प्रदर्शनों में भी कुछ वर्गों द्वारा यह आरोप लगाया गया था कि भारतीय मीडिया ‘पूर्वाग्रह’ के साथ रिपोर्टिंग कर रहा है। ऐसे में यह एडवाइजरी मीडिया की भूमिका को संतुलित और जिम्मेदार बनाए रखने के उद्देश्य से अहम मानी जा रही है।

नेपाल में राजनीतिक हालात बेहद संवेदनशील

नेपाल में हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को पद छोड़ना पड़ा था। प्रदर्शनकारियों ने कई राजनीतिक नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया और राष्ट्रपति से नए संविधान व व्यवस्था की मांग की है। इन परिस्थितियों में, भारतीय मीडिया की हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।

विदेश मंत्रालय की यह एडवाइजरी न केवल भारतीय पत्रकारों के लिए एक सावधानी भरा मार्गदर्शन है, बल्कि यह भारत-नेपाल के मजबूत रिश्तों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश भी है। मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह अपनी स्वतंत्रता का उपयोग जिम्मेदारी से करे और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को ध्यान में रखते हुए संतुलित रिपोर्टिंग प्रस्तुत करे।

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