Tang Renjian Death Sentence: चीन के पूर्व कृषि और ग्रामीण मामलों के मंत्री तांग रेनजियान को भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, तांग ने वर्ष 2007 से 2024 तक विभिन्न सरकारी पदों पर रहते हुए करीब 317.3 करोड़ रुपये (लगभग 44 मिलियन डॉलर) की रिश्वत ली थी।

हालांकि अदालत ने तांग को दो साल की सजा पर मोहलत (Suspended Death Sentence) दी है, जिसका मतलब यह है कि अगर वह दो साल तक अच्छा व्यवहार करते हैं तो सजा को उम्रकैद में बदला जा सकता है। फिर भी, यह फैसला चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की भ्रष्टाचार विरोधी नीति के तहत एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

क्यों सुनाई गई मौत की सजा?
बीजिंग की अदालत ने तांग को दोषी पाते हुए कहा कि:
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उन्होंने जनता और देश के हितों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
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तांग के राजनीतिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया है।
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उनकी संपत्ति जब्त कर ली गई है।
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रिश्वत से जमा की गई धनराशि को राष्ट्रीय खजाने में जमा किया जाएगा।
कोर्ट के अनुसार, तांग ने अपने अपराध स्वीकार किए हैं और पछतावा जताया है। इसके बावजूद, उनके अपराधों की गंभीरता को देखते हुए यह सख्त फैसला सुनाया गया।
शी जिनपिंग की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम
यह कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा है, जो 2012 से शुरू हुआ और अब तक हजारों अधिकारियों को अपनी चपेट में ले चुका है।

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समर्थकों का मानना है कि यह मुहिम शासन व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाती है।
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वहीं, आलोचकों का आरोप है कि इसे शी जिनपिंग अपने राजनीतिक विरोधियों को हटाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
तांग रेनजियान का राजनीतिक सफर
तांग रेनजियान ने लंबे समय तक गांसु प्रांत के गवर्नर और गुआंगशी स्वायत्त क्षेत्र के उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उनका राजनीतिक करियर काफी प्रभावशाली रहा, लेकिन रिश्वतखोरी और पद का दुरुपयोग उनकी छवि और विरासत को कलंकित कर गया।
तांग के बाद अब पूर्व रक्षा मंत्रियों ली शांगफू और वेई फेंघे भी भ्रष्टाचार के आरोपों के तहत जांच के दायरे में आ चुके हैं, जिससे चीन के उच्च पदस्थ नेतृत्व पर निगरानी और सख्ती और भी बढ़ गई है।तांग रेनजियान को मिली मौत की सजा चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति का एक स्पष्ट संकेत है। यह निर्णय न सिर्फ सरकारी तंत्र में सख्ती का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अब कोई भी पदाधिकारी कानून से ऊपर नहीं है।











