Bhupesh Baghel News: छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमाई हुई है। इस बार विवाद का केंद्र बना है रायपुर नगर निगम की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भेजा गया 7,258 रुपये का प्रॉपर्टी टैक्स डिमांड नोटिस। हालांकि नगर निगम का कहना है कि यह कोई आधिकारिक नोटिस नहीं, बल्कि ऑटोमेटिक सिस्टम से जनरेट हुआ ऑनलाइन डिमांड बिल है। लेकिन बघेल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर दी प्रतिक्रिया
पूर्व सीएम बघेल ने इस डिमांड नोट को “अवैध” करार देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा “वैसे तो शासकीय आवास में संपत्ति कर नहीं लगता, फिर भी जिस पाटन सदन को मैंने पौने दो साल पहले ही खाली कर दिया था, आज मुझे नोटिस भेजा गया है। भले ही यह नोटिस अवैध है, मैं मुख्यमंत्री जी की इच्छा पूरी करूंगा।” उन्होंने चुटकी लेते हुए यह भी जोड़ा कि “मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी को 7,258 रुपए अदा करने का वचन देता हूं। अच्छा है कि वे भी तैयार रहें क्योंकि उनकी सरकार कुनकुरी सदन का भी तो टैक्स मांगेगी।”

कांग्रेस ने लगाया “पूर्वाग्रह” का आरोप
इस पूरे प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। पार्टी के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि शासकीय भवनों पर टैक्स वसूलने की कोई परंपरा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूर्व मुख्यमंत्री को निशाना बनाने की सस्ती राजनीति है। उन्होंने तीखा आरोप लगाते हुए कहा“सरकार या तो नशे में है या फिर पूर्वाग्रह ग्रसित। यह हास्यास्पद और चिंताजनक है कि शासकीय संपत्ति पर कर वसूली का नोटिस भेजा गया है।”

नगर निगम और बीजेपी ने दी सफाई
रायपुर की महापौर मीनल चौबे ने सफाई दी कि नगर निगम की ओर से कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है। यह एक ऑटो-जेनरेटेड डिमांड बिल है जो मोबाइल नंबर पर भेजा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि संपत्ति कर इस प्रॉपर्टी पर शून्य है और डिमांड बिल में केवल समेकित कर, जलकर और यूजर्स चार्ज जोड़े गए हैं, जो पूर्व में भी भुगतान किए जाते रहे हैं। बीजेपी प्रवक्ता अमित चिमनानी ने भी इस मामले को तूल देने पर पूर्व मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा “भूपेश बघेल को हर चीज में नोटिस ही नजर आता है। मीडिया में बने रहने के लिए यह एक राजनीतिक नौटंकी है।”
वर्तमान में ‘कुनकुरी सदन’ के रूप में उपयोग हो रहा भवन
जिस पाटन सदन की बात हो रही है, उसे अब कुनकुरी सदन कहा जाता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे जनसेवा के लिए समर्पित किया है। यहां मरीजों के परिजनों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई है। इसके पहले यह पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के क्षेत्रीय आवास के रूप में उपयोग होता था।

इस मामूली से टैक्स डिमांड बिल को लेकर उठा विवाद एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में सरकार और विपक्ष के बीच तीखे तेवरों को उजागर करता है। जहां एक ओर कांग्रेस इसे राजनीतिक द्वेष बता रही है, वहीं भाजपा इसे गैर-मामूली बात का मुद्दा बनाने की कोशिश कह रही है। आने वाले समय में यह विवाद किस मोड़ पर जाएगा, यह देखना बाकी है।
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