Jagdeep Dhankhar : पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अभी तक शहरी विकास मंत्रालय से आधिकारिक आवास की कोई मांग नहीं की है, लेकिन इसके बावजूद संपदा निदेशालय ने लुटियंस दिल्ली के एपीजे अब्दुल कलाम रोड पर स्थित एक टाइप-8 बंगले को उनके लिए खाली करा लिया है। सूत्रों के मुताबिक, यदि धनखड़ इस बंगले को स्वीकार नहीं करते हैं, तो मंत्रालय उन्हें दूसरे विकल्प के रूप में पैतृक निवास पर दो एकड़ जमीन का विकल्प दे सकता है।

पूर्व उपराष्ट्रपतियों को क्या सुविधाएं मिलती हैं?
सरकारी नियमों के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपतियों, उपराष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों को सेवानिवृत्ति के बाद लुटियंस ज़ोन में एक टाइप-8 बंगला आवंटित किया जाता है या फिर उनके स्थायी निवास पर दो एकड़ जमीन आवंटन की जा सकती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य उन्हें सुरक्षा, सुविधा और गरिमा के साथ निवास प्रदान करना है।

स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा
74 वर्षीय जगदीप धनखड़ ने 22 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने पत्र में लिखा: “स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं।” धनखड़ का इस्तीफा संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत स्वीकार किया गया। धनखड़ ने मानसून सत्र के पहले दिन, यानी 21 जुलाई को राज्यसभा के सभापति के रूप में कुछ समय के लिए अध्यक्षता की थी।
इसके ठीक एक दिन बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीतिक हलकों में कई अटकलें शुरू हो गईं। हालांकि, उन्होंने अपने फैसले को स्वास्थ्य प्राथमिकताओं से जोड़ा और किसी भी राजनीतिक वजह से इनकार किया। निर्वाचक मंडल में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य शामिल होते हैं। वे गुप्त मतदान और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote System) के जरिए मतदान करते हैं।
राजनीतिक संकेत और प्रशासनिक तैयारी
हालांकि पूर्व उपराष्ट्रपति ने सरकारी बंगले की औपचारिक मांग नहीं की, लेकिन संपदा निदेशालय ने पहले ही संभावित आवश्यकता को देखते हुए टाइप-8 बंगले को आरक्षित कर दिया है। यह केंद्र सरकार की उस प्रोटोकॉल व्यवस्था का हिस्सा है जो पूर्व उच्च पदस्थ अधिकारियों के लिए तुरंत आवास उपलब्ध कराने हेतु तैयार रहती है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की ओर से अभी तक आवास की कोई औपचारिक मांग नहीं आई है, लेकिन सरकार ने प्रोटोकॉल के तहत अग्रिम तैयारी कर ली है। ऐसे में अगर वह सरकारी बंगले को स्वीकार नहीं करते, तो उन्हें वैकल्पिक विकल्पों पर विचार करने का मौका दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है और 9 सितंबर को देश को नया उपराष्ट्रपति मिल जाएगा।
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