G Ram Ji Bill
G Ram Ji Bill : भारतीय संसदीय इतिहास में आज का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा। केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया ‘जी राम जी विधेयक’ लोकसभा में भारी शोर-शराबे और विरोध के बावजूद पारित कर दिया गया है। यह विधेयक ऐतिहासिक ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) का स्थान लेगा। विपक्ष ने इस बदलाव का कड़ा विरोध किया है, जिसके चलते सदन की कार्यवाही के दौरान तीखी नोकझोंक और अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिले।
जैसे ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया शुरू की, विपक्षी सदस्य लामबंद हो गए। विपक्ष की मांग थी कि इस महत्वपूर्ण विधेयक को गहन जांच के लिए ‘संसद की स्थायी समिति’ (Standing Committee) के पास भेजा जाए। हालांकि, स्पीकर ने यह कहते हुए इस मांग को खारिज कर दिया कि सदन में विधेयक के सभी पहलुओं पर पहले ही विस्तार से चर्चा हो चुकी है। इस निर्णय से नाराज विपक्षी सांसद सदन के बीचों-बीच (वेल) आकर नारेबाजी करने लगे और विरोध स्वरूप विधेयक की प्रतियां फाड़ दीं। अब यह विधेयक चर्चा और पारित होने के लिए राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
सदन में सांसदों के व्यवहार को देखकर स्पीकर ओम बिड़ला ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने अमर्यादित आचरण करने वाले सांसदों को टोकते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है और यहां का व्यवहार गरिमापूर्ण होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “जनता ने आपको यहां कागज फाड़ने और फेंकने के लिए नहीं भेजा है। पूरा देश आपके इस आचरण को देख रहा है।” स्पीकर ने इस बात पर जोर दिया कि असहमति जताने का अधिकार सबको है, लेकिन सदन की मर्यादा का उल्लंघन स्वीकार्य नहीं है।
विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, डीएमके के टीआर बालू और सपा के धर्मेंद्र यादव ने इस विधेयक के खिलाफ मोर्चा संभाला। विपक्षी सांसदों का मुख्य तर्क यह था कि कानून के नाम से ‘महात्मा गांधी’ का नाम हटाना सीधे तौर पर राष्ट्रपिता का अपमान है। इसके अलावा, विपक्ष ने यह चिंता भी जताई कि नया कानून राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय और प्रशासनिक बोझ डालेगा, जिससे ग्रामीण रोजगार योजना का मूल ढांचा ही चरमरा सकता है।
सरकार की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों का करारा जवाब दिया। उन्होंने प्रियंका गांधी की उस टिप्पणी पर पलटवार किया जिसमें उन्होंने सरकार पर ‘नाम बदलने का जुनून’ होने का आरोप लगाया था। चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक केवल नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर योजनाएं बनाईं, जबकि मोदी सरकार का ध्यान केवल और केवल काम पर है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि मनरेगा समय के साथ भ्रष्टाचार का एक अड्डा बन गया था। उन्होंने दावा किया कि ‘जी राम जी विधेयक’ सभी हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद लाया गया है और यह अधिक पारदर्शी और प्रभावी साबित होगा।
लोकसभा से पारित होने के बाद अब इस विधेयक की अगली चुनौती उच्च सदन यानी राज्यसभा में होगी। चूंकि विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट नजर आ रहा है, इसलिए राज्यसभा में भी तीखी बहस होने के आसार हैं। सरकार का मानना है कि यह बदलाव ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलेगा, जबकि विपक्ष इसे इतिहास मिटाने की कोशिश करार दे रही है।
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