Republic Day 2026
Republic Day 2026: भारत साल 2026 में अपना 77वां गणतंत्र दिवस बेहद गौरव और भव्यता के साथ मनाने की तैयारी कर रहा है। नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक समारोह के लिए मुख्य अतिथियों का चयन कर लिया गया है। इस बार का आयोजन विशेष है क्योंकि भारत ने एक नहीं, बल्कि दो अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला गर्ट्रूड वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह की शोभा बढ़ाएंगे।
आमतौर पर गणतंत्र दिवस के अवसर पर किसी एक राष्ट्र के प्रमुख को आमंत्रित करने की परंपरा रही है, लेकिन 2026 में भारत ने यूरोपीय संघ के दो सबसे प्रभावशाली पदों पर आसीन नेताओं को आमंत्रित कर अपनी विदेश नीति की सुदृढ़ता का परिचय दिया है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा (एंटोनियो लुइस सैंटोस दा) की उपस्थिति भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाती है। यह कदम न केवल व्यापारिक रिश्तों को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में भारत की बढ़ती साख का भी प्रतीक है।
उर्सुला गर्ट्रूड वॉन डेर लेयेन वर्तमान में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष के रूप में विश्व की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में शुमार हैं। एक जर्मन राजनेता के रूप में उनका करियर बेहद प्रभावशाली रहा है।
प्रारंभिक जीवन: अक्टूबर 1958 में जन्मी उर्सुला पेशे से एक डॉक्टर हैं, जो उनके निर्णय लेने की क्षमता में स्पष्टता और संवेदनशीलता लाती है।
राजनीतिक उपलब्धियां: वे जर्मनी की ‘क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन’ (CDU) पार्टी की एक प्रमुख स्तंभ रही हैं। जर्मनी के इतिहास में उनके नाम कई कीर्तिमान दर्ज हैं, जिनमें से एक जर्मनी की पहली महिला सांसद होना भी है।
अनुभव: साल 2005 से 2013 के बीच उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, युवाओं और श्रम मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। इसके बाद, उन्होंने जर्मनी की रक्षा मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं, जो उनकी प्रशासनिक कुशलता को प्रमाणित करता है।
समारोह के दूसरे मुख्य अतिथि एंटोनियो लुइस सैंटोस दा (जिन्हें एंटोनियो कोस्टा के नाम से भी जाना जाता है) वर्तमान में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं।
पृष्ठभूमि: 17 जुलाई 1961 को जन्मे कोस्टा पेशे से एक वकील हैं। उनकी राजनीतिक जड़ें काफी गहरी हैं और वे सोशलिस्ट पार्टी के महासचिव भी रह चुके हैं।
नेतृत्व: यूरोपीय परिषद की कमान संभालने से पहले, उन्होंने पुर्तगाल के प्रधानमंत्री के रूप में एक लंबा और सफल कार्यकाल पूरा किया है। उनके नेतृत्व में पुर्तगाल ने आर्थिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की थी। अब वे यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच समन्वय और नीति निर्धारण में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
इन दोनों नेताओं का 26 जनवरी को भारत आना वैश्विक मंच पर एक बड़ा संदेश है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (FTA) और तकनीकी सहयोग को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। ऐसे में इन नेताओं की उपस्थिति इन समझौतों को अंतिम रूप देने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत हो सकती है। कर्तव्य पथ पर जब भारतीय सेना का शौर्य और देश की सांस्कृतिक विविधता उनके सामने प्रदर्शित की जाएगी, तो यह भारत की सॉफ्ट पावर और सैन्य शक्ति दोनों का प्रभाव उन पर छोड़ेगा।
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