G20 Summit 2025
G20 Summit 2025: दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने जलवायु परिवर्तन पर एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घोषणापत्र पारित किया। यह कदम इसलिए भी उल्लेखनीय माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका की आपत्ति और उसके शिखर सम्मेलन के बहिष्कार के बावजूद शेष देशों ने सर्वसम्मति से इस दस्तावेज़ को मंजूरी दी।रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने बताया कि अमेरिका ने घोषणापत्र की भाषा और कुछ शब्दों पर गंभीर आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद अन्य देशों का रुख स्पष्ट था कि इस मसौदे में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यह स्थिति वॉशिंगटन और प्रिटोरिया के बीच बढ़ते तनाव को भी उजागर करती है।
शिखर सम्मेलन में अमेरिका की अनुपस्थिति ने वैश्विक स्तर पर कई सवाल खड़े किए। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका के साथ बढ़ते राजनयिक मतभेदों के चलते इस महत्वपूर्ण वैश्विक बैठक का बहिष्कार किया। अमेरिकी अनुपस्थिति के बावजूद अन्य देशों का आगे बढ़कर संयुक्त घोषणा पारित करना अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में असामान्य कदम माना जा रहा है।अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति रामफोसा ने बताया कि घोषणापत्र को शिखर सम्मेलन की शुरुआत में ही स्वीकार किया गया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर पहले ही व्यापक सहमति बन चुकी थी, इसलिए इस घोषणा को आगे टालने का कोई औचित्य नहीं था। इस कदम को कई विश्लेषकों द्वारा जी20 की कार्यशैली में एक अनोखा बदलाव बताया जा रहा है।
रामफोसा के प्रवक्ता विंसेंट मैग्वेन्या ने बताया कि आमतौर पर जी20 घोषणापत्र को शिखर सम्मेलन के अंतिम सत्र में मंजूरी दी जाती है। लेकिन इस बार सभी देशों के मजबूत समर्थन ने आयोजकों को इसे शुरुआत में ही पारित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला व्यापक सहमति का सम्मान करते हुए लिया गया है।दक्षिण अफ्रीका के अधिकारियों ने यह भी पुष्टि की कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रिटोरिया पर दबाव बनाया था कि उनकी गैर-मौजूदगी में किसी भी संयुक्त घोषणापत्र को पारित न होने दिया जाए। हालांकि, मेजबान देश ने इस दबाव को स्वीकार नहीं किया और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर वैश्विक हितों को प्राथमिकता दी।
प्रवक्ता मैग्वेन्या ने कहा कि इस दस्तावेज़ को तैयार करने में पूरे वर्ष कड़ी मेहनत की गई। शिखर सम्मेलन से पहले का आखिरी सप्ताह भी बेहद महत्वपूर्ण और व्यस्त रहा, जिसमें विभिन्न देशों के बीच लंबे समय तक चर्चा और मसौदे पर सहमति बनाने की कोशिशें जारी रहीं।अमेरिका की अनुपस्थिति और विरोध के बावजूद जी20 देशों का जलवायु घोषणापत्र को सर्वसम्मति से स्वीकार करना वैश्विक एकजुटता का संकेत माना जा रहा है। यह निर्णय न केवल जलवायु परिवर्तन के प्रति बढ़ती गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि दुनिया अब इस मुद्दे पर किसी एक देश की नीतियों का इंतज़ार करने जैसी स्थिति में नहीं है।
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