Gariaband Sarpanch Protest : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में दीपावली से पहले ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। पंचायतों को मूलभूत राशि नहीं मिलने और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत बकाया भुगतान जारी नहीं होने से नाराज सरपंचों ने रैली निकाली। इस दौरान उन्होंने हाथों में कटोरा लेकर प्रतीकात्मक रूप से भीख मांगी और शासन-प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करने की कोशिश की। प्रदर्शन के बाद सरपंच तिरंगा चौक पहुंचे और सड़क पर बैठकर चक्काजाम किया।
तिरंगा चौक पर चक्काजाम कर जताई नाराजगी
सरपंचों का कहना है कि दीपावली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार से पहले भी ग्राम पंचायतों को जरूरी मूलभूत राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके कारण गांवों में विकास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं। वहीं मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों का भुगतान लंबे समय से लंबित है। इसी मुद्दे को लेकर जिला सरपंच संघ ने रैली निकालकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा चौक पर सड़क पर बैठकर चक्काजाम किया और लंबित राशि जारी करने की मांग उठाई।

आठ महीने से मनरेगा की मजदूरी और सामग्री का भुगतान लंबित
जिला सरपंच संघ की ओर से शासन-प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में भुगतान से जुड़ी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। संघ का दावा है कि जिले की ग्राम पंचायतों में मनरेगा के अंतर्गत करीब 30 करोड़ रुपये के विकास और निर्माण कार्य कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद इन कार्यों की मजदूरी और सामग्री की राशि लगभग आठ महीने से लंबित है। सरपंचों के अनुसार, भुगतान नहीं होने से पंचायतों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और आगे के काम कराने में भी परेशानी हो रही है।

मूलभूत और 16वें वित्त आयोग की राशि नहीं मिलने की शिकायत
सरपंच संघ ने ज्ञापन में कहा है कि ग्राम पंचायतों को मूलभूत मद और 16वें वित्त आयोग से मिलने वाली राशि भी जारी नहीं हुई है। इन निधियों का उपयोग गांवों में आवश्यक सुविधाओं और विकास कार्यों के लिए किया जाता है। राशि उपलब्ध नहीं होने से पंचायतों का नियमित संचालन प्रभावित हो रहा है। संघ का कहना है कि वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण कई जरूरी कार्य समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार से लंबित अनुदान जल्द जारी करने की मांग की है।
मूल्यांकन के बाद भी पांच से छह महीने से अटके बिल
ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि कई निर्माण कार्यों का मूल्यांकन और सत्यापन पूरा हो चुका है, लेकिन उनका भुगतान पांच से छह महीने से नहीं हुआ है। सरपंचों के मुताबिक, काम पूरा कराने के बाद भी राशि नहीं मिलने से संबंधित भुगतान की जिम्मेदारी निभाना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा उपसरपंचों और पंचों का मानदेय भी लंबित बताया गया है। संघ ने इन सभी समस्याओं का समाधान जल्द करने की मांग उठाई है।

दीपावली से पहले भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
जिला सरपंच संघ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि दीपावली से पहले लंबित भुगतान और अन्य मांगों का निराकरण नहीं किया गया, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई जाएगी। सरपंचों का कहना है कि त्योहार के समय भी पंचायतों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से मनरेगा की मजदूरी और सामग्री की राशि, मूलभूत अनुदान तथा अन्य लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की अपील की है।
क्या होती है ग्राम पंचायतों की मूलभूत राशि?
ग्राम पंचायतों को मिलने वाली मूलभूत राशि या मूलभूत मद अनुदान गांवों में बुनियादी सुविधाएं विकसित करने और उनका रखरखाव करने के लिए दिया जाता है। यह राशि राज्य सरकार या वित्त आयोग के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है। इसका उपयोग पेयजल व्यवस्था, साफ-सफाई, नालियों के निर्माण और सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था जैसे जरूरी कार्यों में किया जाता है। पंचायतों के लिए यह अनुदान गांवों की दैनिक जरूरतों और विकास गतिविधियों को संचालित करने का महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत है।


