अंतरराष्ट्रीय

Gaza missile attack: गाजा में इजरायली मिसाइल हमले से 15 की मौत, मानवता पर फिर उठे सवाल

Gaza missile attack:  गुरुवार को गाजा पट्टी के दीर अल बलाह शहर में एक दर्दनाक त्रासदी घटी, जब एक स्वास्थ्य केंद्र के बाहर सहायता पाने की आस में कतार में खड़े लोगों पर इजरायल की मिसाइल आ गिरी। इस भयावह हमले में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें आठ बच्चे और तीन महिलाएं शामिल थीं। मृतकों में एक दो साल का मासूम भी शामिल था, जो केवल इलाज के लिए लाइन में अपनी मां के साथ खड़ा था।

‘प्रोजेक्ट होप’ क्लिनिक के सामने कतार में लगे लोगों को बनाया गया निशाना

यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिकी गैर-सरकारी संस्था ‘प्रोजेक्ट होप’ के क्लिनिक के बाहर लोग कुपोषण और संक्रमण जैसी बीमारियों का इलाज कराने के लिए कतार में खड़े थे। संस्था के प्रमुख रबीह तुर्बे ने बताया कि इस क्लिनिक की सटीक लोकेशन पहले ही इजरायली सेना को सूचित कर दी गई थी ताकि सैन्य कार्रवाई से इसे सुरक्षित रखा जा सके। फिर भी यहां हमला हुआ। उन्होंने कहा, “हमारे क्लिनिक के बाहर दरवाजे खुलने का इंतजार कर रहे मासूम बच्चे और महिलाएं बेरहमी से मार दिए गए।”

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने उठाए सवाल

इजरायली सेना ने हमले के बाद बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई 7 अक्टूबर 2023 को हुए आतंकी हमले में शामिल एक हमास सदस्य को निशाना बनाने के लिए की गई थी। सेना ने यह भी कहा कि आम नागरिकों को बचाने की हरसंभव कोशिश की जाती है और इस घटना की जांच की जाएगी। हालांकि प्रत्यक्षदर्शियों और चिकित्सा सहायता संगठनों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के डॉ. मुहम्मद अबू मुगैसिब ने कहा, “यह मानवता के खिलाफ हमला है। अब गाजा में उम्मीद एक टूटती हुई चीज बन चुकी है।”

आम लोगों की हालत बेहद खराब

गाजा में स्थिति इस कदर भयावह हो गई है कि लोगों को हर दिन सिर्फ भोजन और दवा की तलाश में निकलना पड़ता है, और वही तलाश कई बार उनकी मौत बन जाती है। डॉ. मुगैसिब का कहना है कि अब लोगों के आंखों से आंसू भी सूख चुके हैं, क्योंकि लगातार हो रही मौतों और बर्बादी के चलते उनमें रोने की ताकत तक नहीं बची है। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में करीब 3,000 फिलिस्तीनी नागरिकों की जान जा चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।

हमास ने इजरायली सेना के खिलाफ बढ़ाए गुरिल्ला हमले

दूसरी ओर, हमास ने इजरायली सैन्य ठिकानों पर गुरिल्ला हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजा के उत्तरी इलाके बीत हनून में पांच इजरायली सैनिकों की मौत हुई है। वहीं, यरुशलम के पास एक 20 वर्षीय इजरायली युवक को चाकू मारकर और गोलीबारी कर जान से मार दिया गया। इन हमलों के पीछे दो फिलिस्तीनी पुलिसकर्मी होने की बात सामने आ रही है, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि संघर्ष अब और भी जटिल रूप लेता जा रहा है।

गाजा संघर्ष का प्रभाव अब क्षेत्रीय जल सीमाओं तक पहुंच गया है। हाल ही में लाल सागर में दो जहाजों के डूबने और मिसाइल हमलों की घटनाओं के बाद, इजरायल ने अमेरिका से एक बार फिर यमन के हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने की अपील की है। हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हौथी ने चेतावनी दी है कि यदि गाजा में बमबारी नहीं रुकी तो इजरायल से जुड़े जहाजों को लगातार निशाना बनाया जाएगा।

नेतन्याहू बोले- बंधकों की रिहाई पर हो सकता है समझौता

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका यात्रा से लौटते समय मीडिया से बातचीत में कहा कि बंधकों की रिहाई को लेकर एक समझौता कुछ ही दिनों में संभव हो सकता है। उन्होंने बताया कि एक प्रस्तावित योजना के तहत 60 दिनों का संघर्षविराम लागू किया जा सकता है, जिसके पहले चरण में कुछ बंधकों की रिहाई की जाएगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर इजरायल पर युद्ध विराम और मानवता की रक्षा के लिए दबाव बढ़ रहा है।

इस्फहान में अमेरिकी हमले के बाद ईरान पर भी सवाल

इस बीच, अमेरिका द्वारा ईरान के इस्फहान में किए गए एक हालिया हमले को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। इजरायली खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान की यूरेनियम संवर्धन साइट्स अब भी सक्रिय हो सकती हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी बंकर बस्टर बम वास्तव में उन ठिकानों तक पहुंचे या नहीं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की तीनों परमाणु साइट्स पूरी तरह से नष्ट कर दी गई हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस दावे से सहमत नहीं हैं और स्थिति की स्वतंत्र जांच की मांग कर रही हैं।

गाजा में इजरायल की कार्रवाई और इसके जवाब में फिलिस्तीनी समूहों की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर पश्चिम एशिया को विनाश के कगार पर ला खड़ा किया है। आम नागरिक—खासकर महिलाएं और बच्चे—इस संघर्ष का सबसे बड़ा शिकार बनते जा रहे हैं। युद्ध विराम और मानवीय राहत की जरूरत हर बीतते दिन के साथ और भी जरूरी हो गई है, मगर राजनीतिक इच्छाशक्ति और वैश्विक सहयोग की कमी इस त्रासदी को लगातार गहरा कर रही है।

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