Gaza Yellow Line
Gaza Yellow Line: गाजा पट्टी में इजरायली सेना द्वारा निर्धारित की गई नई सीजफायर लाइन फिलिस्तीनियों के लिए काल बन गई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, एक “अस्पष्ट” विभाजक रेखा का उल्लंघन करने के कारण कम से कम 62 फिलिस्तीनी नागरिकों को इजरायली सैनिकों ने मौत के घाट उतार दिया है। अक्टूबर में हुए सीजफायर समझौते के बाद इजरायली सेना ने कुछ क्षेत्रों से पीछे हटते हुए एक सांकेतिक ‘येलो लाइन’ (पीली रेखा) खींची थी। हालांकि, यह रेखा जमीन पर कहीं दिखती है और कहीं पूरी तरह अदृश्य है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे हर पल खौफ के साये में जी रहे हैं, क्योंकि इस रेखा के पास जाने या गलती से इसे पार करने का अर्थ सीधे मौत से सामना होना है।
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सीजफायर लागू होने से लेकर अब तक लगभग 447 फिलिस्तीनियों की जान जा चुकी है। इनमें से 77 लोग विशेष रूप से इस पीली रेखा के पास हुई गोलीबारी का शिकार हुए हैं। विशेषज्ञों और मैपिंग विशेषज्ञों का आरोप है कि इजरायल ने समझौते में तय की गई दूरी से आधा किलोमीटर अधिक गहरा बफर जोन बना लिया है, जिससे गाजा का एक बड़ा हिस्सा प्रभावी रूप से इजरायली नियंत्रण में चला गया है। मरने वालों में न केवल युवक बल्कि मासूम बच्चे और किशोर भी शामिल हैं, जो अनजाने में इस जानलेवा घेरे में फंस गए।
इजरायली सेना ने सीमा निर्धारित करने के लिए कुछ स्थानों पर पीले बैरल और कंक्रीट के अवरोधक लगाए हैं। गाजा सिटी के निवासी अहमद अबू जहांल बताते हैं कि ये मार्कर उनके घरों के बेहद करीब हैं। सेना के नक्शे में जो दूरी 500 मीटर दिखाई गई है, हकीकत में वह 100 मीटर से भी कम है। लोग अब इन पीले बैरलों की ओर देखने से भी डरते हैं। इजरायली सेना का दावा है कि मारे गए अधिकांश लोग उग्रवादी थे और सैनिक नियमों के तहत कार्रवाई कर रहे हैं। हालांकि, जमीन पर रहने वाले नागरिक कहते हैं कि चेतावनी के नाम पर सीधे गोलियां बरसाई जाती हैं।
इजरायल ने अपनी सेना को 7 किलोमीटर गहरे बफर जोन में पीछे हटा लिया है। इस क्षेत्र में गाजा की सबसे उपजाऊ कृषि भूमि, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ऊंचे इलाके और सभी प्रमुख बॉर्डर क्रॉसिंग शामिल हैं। इसके परिणामस्वरूप 20 लाख से अधिक फिलिस्तीनी आबादी अब तटीय पट्टी के एक छोटे से हिस्से में सिमट कर रह गई है। संसाधनों की कमी और तबाही के बीच, लोग भोजन और आश्रय की तलाश में भटकते हुए अनजाने में इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश कर जाते हैं, जहाँ इजरायली स्नाइपर्स तैनात रहते हैं।
अल-अहली अस्पताल के निदेशक फदेल नईम ने बताया कि अस्पताल के इमरजेंसी रूम में रोजाना ऐसे लोग लाए जा रहे हैं जिनके शरीर गोलियों से छलनी होते हैं। इनमें से कई की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो चुकी होती है। नईम ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि गाजा में मलबे और तबाही के कारण रास्तों की पहचान करना मुश्किल है। हाल ही में वे खुद एक यात्रा के दौरान गलती से रेखा पार करने वाले थे, लेकिन स्थानीय लोगों की चीख-पुकार सुनकर वे समय रहते पीछे हट गए।
इस पूरे विवाद पर इजरायली सेना का कहना है कि वे रेखा पार करने वालों को पहले मौखिक चेतावनी देते हैं और फिर हवा में फायर करते हैं। एक सैन्य अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सैनिक तभी गोली चलाते हैं जब उन्हें लगता है कि रेखा पार करने वाला व्यक्ति सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है। लेकिन नागरिकों की बढ़ती मौतें इन दावों पर सवालिया निशान लगाती हैं। यह अस्पष्ट सीमा रेखा अब गाजा में एक ऐसी ‘डेडलाइन’ बन चुकी है, जहाँ एक कदम की गलती का अंत केवल कब्रिस्तान में होता है।
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