Giant Snake In Korba
Giant Snake In Korba: छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर कोरबा से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। बालको रेंज के अंतर्गत आने वाले तिलईडाड़ गांव में पिछले कुछ दिनों से ग्रामीण एक अज्ञात भय के साये में जी रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि इलाके में एक विशालकाय सांप बार-बार देखा जा रहा था, जिससे लोगों का घर से निकलना दूभर हो गया था। यह डर तब और बढ़ गया जब यह विशाल सांप एक ग्रामीण के घर के पास बने सेफ्टी टैंक में जा गिरा। पास जाकर देखने पर पता चला कि यह कोई साधारण सांप नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे जहरीले सांपों में शुमार ‘किंग कोबरा’ है।
जैसे ही सेफ्टी टैंक में किंग कोबरा के होने की खबर फैली, पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने बिना देरी किए इसकी सूचना वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण टीम ‘नोवा नेचर’ को दी। सूचना मिलते ही अनुभवी सर्प मित्र जितेंद्र सारथी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। करीब 12 फीट लंबे इस किंग कोबरा को टैंक से बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा काम था। सांप के विशाल आकार और उसकी फुर्ती ने रेस्क्यू टीम के भी पसीने छुड़ा दिए। कड़ी मशक्कत और सूझबूझ के बाद जितेंद्र सारथी ने सुरक्षित तरीके से सांप को पकड़ लिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। पकड़े गए कोबरा को बाद में घने जंगलों में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
सांपों से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण खबर पूर्वोत्तर भारत के मिजोरम राज्य से आई है। यहाँ के वैज्ञानिकों ने रूस, जर्मनी और वियतनाम के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मिजोरम में ‘रीड स्नेक’ (Calamaria) की एक बिल्कुल नई प्रजाति की पहचान की गई है। इस महत्वपूर्ण खोज ने सरीसृपों की दुनिया में लंबे समय से चले आ रहे भ्रम को समाप्त कर दिया है। यह खोज न केवल भारत के जैव-विविधता (Biodiversity) प्रोफाइल को समृद्ध करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि हिमालयी क्षेत्रों में अभी भी कई रहस्य छिपे हुए हैं।
मिजोरम विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के प्रोफेसर और इस अंतरराष्ट्रीय शोध दल के प्रमुख, एच. टी. लालरेमसंगा ने बताया कि इस नई प्रजाति का वैज्ञानिक नाम राज्य के सम्मान में ‘कैलामारिया मिजोरमेंसिस’ रखा गया है। यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका ‘जूटाक्सा’ (Zootaxa) में प्रकाशित हुआ है। रोचक बात यह है कि इस सांप के नमूने पहली बार साल 2008 में एकत्र किए गए थे, लेकिन उस समय पर्याप्त तकनीक के अभाव में इसे दक्षिण-पूर्व एशिया की एक सामान्य प्रजाति मान लिया गया था। अब विस्तृत डीएनए (DNA) विश्लेषण और शारीरिक परीक्षण के बाद इसे एक स्वतंत्र प्रजाति घोषित किया गया है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे कोरबा में मिला किंग कोबरा हो या मिजोरम में खोजी गई नई प्रजाति, ये सभी हमारे पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) के महत्वपूर्ण अंग हैं। सांपों का अस्तित्व पर्यावरण में चूहों और अन्य कीड़ों की आबादी को नियंत्रित रखने के लिए अनिवार्य है। कोरबा की घटना वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में सक्रियता दिखाती है, वहीं मिजोरम की खोज भारत को सरीसृप अनुसंधान (Herpetology) के वैश्विक नक्शे पर मजबूती से स्थापित करती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सांप दिखने पर उन्हें नुकसान न पहुँचाएं और तुरंत विशेषज्ञों को सूचित करें।
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