अंतरराष्ट्रीय

Giorgia Meloni: ट्रंप के बयान पर भड़कीं मेलोनी, अफगानिस्तान में इटली के बलिदान का दिया हवाला

Giorgia Meloni : रोम से एक बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है, जहां इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने दावा किया था कि अफगानिस्तान युद्ध के दौरान नाटो (NATO) के सहयोगी देश फ्रंटलाइन पर मौजूद नहीं थे। इसके जवाब में मेलोनी ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि इटली सरकार को अमेरिकी राष्ट्रपति की बातों से “गहरा आश्चर्य” हुआ है। मेलोनी ने याद दिलाया कि 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद नाटो ने अपने इतिहास में पहली बार ‘आर्टिकल 5’ को एक्टिवेट किया था, जो अमेरिका के प्रति पूरी दुनिया की असाधारण एकजुटता का प्रतीक था।

इटली का बड़ा बलिदान: 53 सैनिकों की शहादत और 700 घायल

जॉर्जिया मेलोनी ने आंकड़ों के साथ ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ इस वैश्विक लड़ाई में इटली ने कभी भी कदम पीछे नहीं खींचे। इटली ने हजारों की संख्या में अपने सैनिक अफगानिस्तान भेजे और ‘रीजनल कमांड वेस्ट’ जैसी महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। मेलोनी ने भावुक होते हुए कहा कि 20 वर्षों तक चले इस लंबे मिशन के दौरान इटली ने जो कीमत चुकाई है, उस पर कोई विवाद नहीं हो सकता। इस युद्ध में इटली के 53 वीर सैनिक शहीद हुए और 700 से अधिक जवान घायल हुए, जो सुरक्षा अभियानों और अफगान सुरक्षा बलों की ट्रेनिंग में सक्रिय रूप से शामिल थे।

आपसी सम्मान की मांग: नाटो की एकजुटता के लिए सम्मान जरूरी

इटली की प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि नाटो सहयोगियों के योगदान को कम करके आंकने वाले बयान किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं, खासकर जब वे किसी मित्र देश की ओर से आए हों। उन्होंने कहा कि इटली और अमेरिका के बीच की दोस्ती ऐतिहासिक सहयोग और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। मेलोनी के अनुसार, वर्तमान की जटिल वैश्विक चुनौतियों के समय में यह दोस्ती और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, लेकिन इसके लिए “आपसी सम्मान” की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिना सम्मान के नाटो की एकजुटता को बनाए रखना मुश्किल होगा।

ट्रंप का विवादित बयान: दावोस में सहयोगियों पर साधा था निशाना

इस पूरे विवाद की जड़ डोनाल्ड ट्रंप का दावोस में दिया गया वह बयान है, जिसमें उन्होंने नाटो देशों की निष्ठा पर सवाल उठाए थे। ट्रंप ने कहा था, “मुझे विश्वास नहीं है कि नाटो सहयोगी तब मौजूद रहे होंगे जब अमेरिका को उनकी जरूरत पड़ी। वे दावा करते हैं कि उन्होंने कुछ सैनिक भेजे थे, लेकिन वे फ्रंटलाइन से दूर रहे।” ट्रंप के इस बयान ने न केवल इटली बल्कि पूरे यूरोप में नाराजगी की लहर पैदा कर दी है। मेलोनी से पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भी ट्रंप के इस नजरिए की आलोचना कर चुके हैं।

बदलते कूटनीतिक समीकरण: अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ती दूरी

ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और नाटो देशों के प्रति उनके सख्त रवैये ने एक बार फिर ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है। मेलोनी का यह सख्त रुख दर्शाता है कि अब यूरोपीय देश अपनी संप्रभुता और अपने सैनिकों के बलिदान के अपमान को चुपचाप स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या व्हाइट हाउस मेलोनी की इस आपत्ति पर कोई सफाई देता है या फिर यह कूटनीतिक दरार और गहरी होगी।

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