Gold Silver Price Crash
Gold Silver Price Crash: वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारतीय सर्राफा बाजार से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान और इजरायल विवाद पर दिए गए ताजा आक्रामक बयान ने कमोडिटी मार्केट की दिशा बदल दी है। गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को बाजार खुलते ही सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के बीच मची अफरा-तफरी और वैश्विक स्तर पर बदलती रणनीतियों के कारण कीमती धातुओं के दाम अर्श से फर्श पर आ गए हैं, जिससे जेवर खरीदने वालों और निवेशकों दोनों में हलचल तेज हो गई है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज सुबह का नजारा काफी डरावना रहा। सोने की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान ही 2,200 रुपये से अधिक की गिरावट देखी गई, जिससे यह 1,51,480 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया। लेकिन चांदी की स्थिति और भी बदतर रही। सफेद धातु की कीमतों में 10,000 रुपये से ज्यादा की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार, चांदी लगभग 13,613 रुपये प्रति किलो टूटकर 2,29,888 रुपये के स्तर पर कारोबार करती दिखी। बाजार के जानकारों का कहना है कि इतने कम समय में इतनी बड़ी गिरावट विरले ही देखने को मिलती है।
भारतीय बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमती धातुओं पर भारी दबाव देखा जा रहा है। वैश्विक बाजार में सोना लगभग 1.9% फिसलकर 4,688 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। वहीं, चांदी में करीब 5% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 72 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई है। स्पॉट मार्केट (हाजिर बाजार) में भी यही नकारात्मक रुख बना हुआ है। डॉलर की मजबूती और वैश्विक अनिश्चितता के कारण दुनिया भर के बड़े फंड हाउस और निवेशक अपनी पोजीशन को हल्का कर रहे हैं, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है।
इस बड़ी गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने की बात कही है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि आने वाले कुछ हफ्तों तक अमेरिका अपनी आक्रामक सैन्य रणनीति को नहीं बदलेगा। आमतौर पर युद्ध या तनाव के समय सोने को ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश) मानकर इसकी खरीदारी बढ़ जाती है और कीमतें ऊपर जाती हैं। लेकिन इस बार निवेशकों ने अलग रणनीति अपनाते हुए जमकर मुनाफावसूली (Profit Booking) की, जिससे कीमतों में भारी गिरावट आ गई।
सोने की कीमतों पर दबाव बनाने वाला दूसरा बड़ा कारक यूएस फेडरल रिजर्व की नीतियां हैं। अमेरिका में महंगाई का दबाव अभी भी बना हुआ है, जिसके कारण फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करने को लेकर बेहद सतर्क है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 के अंत से पहले ब्याज दरों में किसी भी बड़ी कमी की संभावना काफी कम है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर बिना ब्याज वाली संपत्ति जैसे सोने के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं, जिससे इसकी मांग और कीमतों में कमी आती है।
मौजूदा हालात को देखते हुए बाजार विश्लेषकों ने निवेशकों को ‘रुको और देखो’ की नीति अपनाने की सलाह दी है। युद्ध के हालात और ट्रंप प्रशासन के कड़े फैसलों के बीच सोने और चांदी में निवेश करना फिलहाल जोखिम भरा साबित हो सकता है। बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) बहुत अधिक है, इसलिए छोटे निवेशकों को किसी भी बड़े निवेश से पहले विशेषज्ञों की राय जरूर लेनी चाहिए। फिलहाल के लिए, सर्राफा बाजार में छाई यह लालिमा आने वाले कुछ दिनों तक जारी रह सकती है।
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