Gold Silver Price Today
Gold Silver Price Today: भारतीय घरेलू बाज़ार में सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। लगातार दूसरे कारोबारी दिन सोने के दाम में नरमी (मंदी) देखने को मिली है, जिससे बुलियन मार्केट (सर्राफा बाजार) के निवेशक और विशेषज्ञ दोनों हैरान हैं। सोने के कमजोर प्रदर्शन के ठीक विपरीत, चांदी (Silver) की चमक कम होने का नाम नहीं ले रही है। सिल्वर मार्केट में ज़बरदस्त तेज़ी का रुझान बना हुआ है, जिसने निवेशकों का ध्यान सोने से हटाकर चांदी की ओर आकर्षित किया है। यह सोने और चांदी के बीच विपरीत प्रदर्शन (Divergence) वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और विभिन्न मौद्रिक नीतियों की उम्मीदों के कारण देखा जा रहा है।
सोने के भाव को नीचे धकेलने वाले प्रमुख कारकों में वैश्विक बाज़ार में आई मामूली मंदी, घरेलू स्तर पर ट्रेडर्स द्वारा बड़े पैमाने पर प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking), और सबसे महत्वपूर्ण, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) द्वारा संभावित ब्याज दर कटौती (Interest Rate Cut) की उम्मीदें शामिल हैं। आमतौर पर, मंदी के समय सोना एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) माना जाता है, लेकिन फेड रेट कट की उम्मीदों ने बॉन्ड यील्ड्स को प्रभावित किया है, जिससे सोने पर दबाव बना है। दूसरी ओर, चांदी की मांग में आई तेज़ी के स्पष्ट संकेत इसे लगातार नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर कर रहे हैं, जिसका मुख्य कारण इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग (Industrial Demand) है।
28 नवंबर की सुबह, प्रमुख भारतीय शहरों में सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट शुद्धता वाले सोने (99.9% शुद्धता) की कीमत गिरकर ₹1,27,890 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। यह गिरावट लगातार दूसरे दिन दर्ज हुई है, जो बाजार में अस्थिरता को दर्शाती है। वहीं, आभूषण बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने का भाव भी कम होकर ₹1,17,240 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुँच गया है।
दिल्ली के अलावा देश के अन्य प्रमुख महानगरों में भी यही रुझान देखने को मिला है। मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े बाज़ारों में भी सोने के भाव में नरमी बनी हुई है। इन शहरों में 22 कैरेट गोल्ड लगभग ₹1,17,090 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है, जबकि 24 कैरेट गोल्ड की कीमत ₹1,27,740 रुपये प्रति 10 ग्राम के आस-पास ट्रेड हो रही है। यह स्पष्ट करता है कि सोने की कीमतों में यह गिरावट केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि एक राष्ट्रव्यापी प्रवृत्ति (Nationwide Trend) बन गई है, जो निवेशकों को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर रही है।
सोने की कीमतों में गिरावट केवल घरेलू स्तर तक सीमित नहीं है; वैश्विक बाज़ार (International Market) में भी गोल्ड दबाव में है। अंतर्राष्ट्रीय हाजिर बाज़ार (International Spot Market) में सोने की कीमत गिरकर $4,158.38 डॉलर प्रति औंस (Ounce) के स्तर पर आ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के कई अंतर्संबंधित कारण हैं:
घरेलू बाज़ार में कमज़ोर खरीदारी: भारतीय बाज़ार में त्योहारी और शादी के सीजन के बाद सोने की भौतिक (Physical) खरीदारी कमजोर रही है।
ट्रेडर्स द्वारा प्रॉफिट बुकिंग: पिछले तेज़ी के दौर में खरीदारी करने वाले ट्रेडर्स अब मौजूदा ऊँचे दामों पर अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिक्री (Selling) कर रहे हैं, जिससे आपूर्ति (Supply) बढ़ रही है।
फेडरल रिजर्व की संभावित दर कटौती: सबसे बड़ा कारण अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व से जुड़ी उम्मीदें हैं। बाज़ार में यह मजबूत धारणा बनी हुई है कि फेड दिसंबर की बैठक में ब्याज दरों में और कमी (Rate Cut) कर सकता है। जब ब्याज दरें घटती हैं, तो सरकारी बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) कम हो जाती हैं। बॉन्ड यील्ड घटने से उनका आकर्षण कम होता है, और निवेशक अपने फंड को बॉन्ड से निकालकर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख करते हैं। हालाँकि, वर्तमान में निवेशक इस रेट कट से पहले की अस्थिरता (Pre-Rate Cut Volatility) को देखते हुए सतर्क हैं, जिससे तत्काल दबाव बना हुआ है।
सोने के विपरीत, चांदी की कीमतों में तेज़ी का स्पष्ट रुझान देखने को मिल रहा है। 28 नवंबर को सिल्वर रेट बढ़कर ₹1,73,100 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्च स्तर पर पहुँच गया। चांदी की कीमतों में इस उछाल का मुख्य कारण है इसकी बढ़ती हुई वैश्विक औद्योगिक मांग। चांदी का उपयोग सौर पैनलों (Solar Panels), इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) जैसे उभरते क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होता है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
इस तेज़ी को अमेरिकी बिजनेसमैन और मशहूर लेखक रॉबर्ट कियोसाकी के दावे से भी बल मिला है। अपनी बेस्टसेलर किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक कियोसाकी ने दावा किया है कि आने वाले समय में चांदी की कीमत $70 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच सकती है, और उनका अनुमान है कि 2026 तक यह $200 डॉलर प्रति औंस तक का स्तर छू सकती है। यह दावा निवेशकों की दिलचस्पी को और बढ़ा रहा है, जिससे चांदी को एक उछाल भरा निवेश (High-Growth Investment) माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में चल रही यह गिरावट लंबी अवधि तक कायम नहीं रहेगी। अगर फेडरल रिजर्व वास्तव में ब्याज दरों में कटौती का ऐलान करता है, तो बॉन्ड यील्ड्स में और गिरावट आएगी, जिससे सोने की कीमतों में एक बार फिर मजबूत उछाल (Strong Rally) देखने को मिल सकता है। फेड रेट कट से पहले की यह गिरावट निवेशकों को कम कीमतों पर खरीदारी (Buying at Dips) का अवसर प्रदान कर सकती है।
दूसरी ओर, चांदी की तेज़ी फिलहाल निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न का स्पष्ट संकेत दे रही है। चांदी की दोहरी प्रकृति—कीमती धातु (Precious Metal) और औद्योगिक धातु (Industrial Metal)—इसे दोनों तरह के बाज़ार की तेज़ी से लाभ उठाने में मदद करती है। इस प्रकार, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक मौजूदा बाज़ार की स्थिति का विश्लेषण करें और अपनी जोखिम क्षमता (Risk Appetite) के अनुसार सोने और चांदी के बीच संतुलित निवेश बनाए रखें।
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