अगर आपके पास खेत या बड़ा बगीचा नहीं है, तब भी आप घर पर ताजी सेम उगा सकते हैं। गमले में सेम की फली आसानी से तैयार की जा सकती है। सही मिट्टी, पर्याप्त धूप, पानी और सहारे से पौधा तेजी से बढ़ता है। जानिए घर पर सेम उगाने का आसान तरीका।
अगर आपके पास खेत या बड़ा बगीचा नहीं है, तब भी आप घर पर ताजी सेम उगा सकते हैं। गमले में सेम की फली आसानी से तैयार की जा सकती है। सही मिट्टी, पर्याप्त धूप, पानी और सहारे से पौधा तेजी से बढ़ता है। जानिए घर पर सेम उगाने का आसान तरीका।

Gardening Tips: शहरों में बढ़ती आबादी और बाजार में मिलने वाली सब्जियों में कीटनाशकों के इस्तेमाल को लेकर बढ़ती चिंता के कारण लोग अब घर पर सब्जियां उगाने की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। बालकनी, छत या छोटे से खुले स्थान में गमलों के जरिए ऑर्गेनिक सब्जियां उगाई जा सकती हैं। सेम की फली भी ऐसी ही सब्जी है, जिसे सीमित जगह में आसानी से तैयार किया जा सकता है। प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और जरूरी मिनरल्स से भरपूर सेम स्वादिष्ट होने के साथ पोषण से भी भरपूर होती है।


सेम बेल के रूप में तेजी से बढ़ने वाला पौधा है, इसलिए इसके लिए पर्याप्त जगह वाला गमला जरूरी है। घर पर खेती के लिए 16 से 18 इंच गहरा और चौड़ा गमला उपयुक्त माना जाता है। गमले के नीचे जल निकासी के लिए छेद जरूर होने चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। छेद के ऊपर छोटा टुकड़ा रखने से मिट्टी बहने से बचाई जा सकती है और पानी की निकासी भी बनी रहती है।

सेम के पौधे के लिए मिट्टी हल्की और पोषक तत्वों से भरपूर होनी चाहिए। इसके लिए लगभग 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद और 20 प्रतिशत कोकोपीट मिलाकर मिश्रण तैयार करें। मिट्टी में थोड़ी मात्रा में नीम खली मिलाने से जड़ों को नुकसान पहुंचाने वाले फंगस और कुछ कीटों से बचाव में मदद मिल सकती है।
अच्छी गुणवत्ता वाले तीन सेम के बीज लेकर उन्हें रातभर पानी में भिगो दें। अगले दिन इन बीजों को गमले की मिट्टी में करीब एक इंच गहराई पर बोएं और ऊपर से हल्का पानी दें। मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखें। सामान्य परिस्थितियों में लगभग पांच से सात दिनों में बीज अंकुरित होकर पौधे के रूप में बाहर आने लगते हैं। पौधों के थोड़ा बड़ा होने पर कमजोर पौधों को हटाकर सबसे मजबूत पौधे को रखें।
सेम के पौधे को अच्छी वृद्धि और ज्यादा फलियों के लिए पर्याप्त धूप की आवश्यकता होती है। गमले को ऐसी जगह रखें, जहां पौधे को रोजाना कम से कम छह घंटे सीधी धूप मिल सके। सिंचाई करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि मिट्टी में नमी बनी रहे, लेकिन पानी जमा होकर कीचड़ जैसी स्थिति न बनाए। अधिक पानी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।

सेम की बेल तेजी से फैलती है और आगे चलकर उसका वजन भी बढ़ जाता है। जब पौधा करीब दो फीट ऊंचा हो जाए, तो उसे मजबूत बांस, लकड़ी या सुतली की जाली का सहारा दें। गमले के पास मजबूत मचान तैयार करके बेल को उसके ऊपर फैलाएं। इससे पौधे को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी और फलियां भी आसानी से तोड़ी जा सकेंगी।
जब सेम की बेल करीब चार फीट की ऊंचाई तक पहुंच जाए, तो उसके ऊपरी सिरे को हल्का सा काट सकते हैं। इस प्रक्रिया को पिंचिंग कहा जाता है। इससे पौधे में नई साइड शाखाएं विकसित होने में मदद मिलती है। आगे चलकर इन्हीं शाखाओं पर अधिक फूल और फलियां आ सकती हैं, जिससे उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है।
सेम में फूल आने की शुरुआत के बाद हर 15 दिन में मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें। इसके बाद करीब दो मुट्ठी वर्मीकम्पोस्ट और थोड़ी लकड़ी की राख मिट्टी में मिला सकते हैं। इसमें मौजूद पोषक तत्व पौधे की वृद्धि और फलियों के विकास में मदद करते हैं। नियमित पोषण देने से पौधा स्वस्थ बना रह सकता है और फूलों से फलियां बनने की प्रक्रिया बेहतर हो सकती है।
सेम की पत्तियों पर माहू और रस चूसने वाले दूसरे कीट हमला कर सकते हैं। इनसे बचाव के लिए पांच मिलीलीटर नीम तेल और दो बूंद लिक्विड साबुन को एक लीटर पानी में मिलाकर पौधे पर छिड़काव किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार लगभग 10 दिन के अंतराल पर इसका इस्तेमाल करें। फंगल समस्या से बचाव के लिए खट्टी छाछ का हल्का छिड़काव भी घरेलू बागवानी में अपनाया जाता है।
सही मौसम, पर्याप्त धूप, नियमित पानी और उचित पोषण मिलने पर सेम की हरी फलियां बुवाई के लगभग 65 दिनों बाद तोड़ने लायक हो सकती हैं। तैयार फलियों को समय-समय पर तोड़ते रहना बेहतर रहता है। नियमित तुड़ाई से बेल पर नई फलियों के विकास को प्रोत्साहन मिल सकता है। इस तरह थोड़ी सी जगह और नियमित देखभाल के साथ घर पर लंबे समय तक ताजी सेम की सब्जी का आनंद लिया जा सकता है।
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