GST Update 2025: जीएसटी काउंसिल की हाल ही में हुई बैठक में आम उपभोक्ताओं से जुड़ा बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने अब सिगरेट, गुटखा, पान मसाला, जंक फूड, मीठे शुगरी ड्रिंक्स और लग्जरी कारों जैसे उत्पादों पर जीएसटी दर बढ़ाकर 28% से सीधे 40% कर दी है। यह नई दर 22 सितंबर 2025 से प्रभावी होगी। सरकार ने इस फैसले को ‘सिन और लग्जरी गुड्स टैक्स रिफॉर्म’ का नाम दिया है, जिसका मकसद है:

टैक्स चोरी पर लगाम लगाना
स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले उत्पादों की खपत पर नियंत्रण

टैक्स कलेक्शन बढ़ाकर सरकारी खर्चों की भरपाई करना
तंबाकू उत्पादों की कीमतों में बड़ा उछाल
इस फैसले का सबसे ज्यादा असर तंबाकू उत्पादों पर देखने को मिलेगा। उदाहरण के तौर पर,
जो सिगरेट का पैकेट अभी ₹256 में मिल रहा है, उसकी कीमत बढ़कर लगभग ₹280 हो सकती है।
पान मसाला, गुटखा, जर्दा, चबाने वाले तंबाकू और अन्य तंबाकू उत्पादों की कीमतों में भी 10-15% तक का इज़ाफा संभव है।
यह सभी उत्पाद पहले से ही सिन गुड्स (Sin Goods) माने जाते हैं, जिन पर कंपनसेशन सेस और अतिरिक्त टैक्स पहले भी लागू थे। अब नई दर के साथ ये और महंगे हो जाएंगे।
फास्ट फूड और शुगर ड्रिंक्स पर भी भारी टैक्स
नए 40% टैक्स स्लैब में अब जंक फूड, फास्ट फूड चेन प्रोडक्ट्स, कार्बोनेटेड शुगरी ड्रिंक्स, और फ्लेवर युक्त मीठे पेय पदार्थ भी शामिल किए गए हैं। यह कदम स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए उठाया गया है।
सरकार का तर्क है कि ऐसे उत्पाद मधुमेह (डायबिटीज), मोटापा और अन्य बीमारियों को बढ़ावा देते हैं। इसलिए इनकी खपत पर नियंत्रण जरूरी है।
लग्जरी कार और पर्सनल एयरक्राफ्ट भी दायरे में
सुपर लग्जरी कारें
निजी उपयोग के हवाई जहाज
महंगे एडेड शुगर प्रोडक्ट्स
इन पर भी अब 40% की दर से टैक्स लगेगा, जिससे महंगे शौक और महंगे पड़ जाएंगे।
अब रिटेल प्राइस पर लगेगा टैक्स
जीएसटी काउंसिल ने टैक्स निर्धारण का तरीका भी बदला है। अब टैक्स की गणना Retail Sale Price (RSP) पर होगी, न कि सिर्फ ट्रांजैक्शन वैल्यू पर। इससे टैक्स चोरी पर रोक लगेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
दो टैक्स स्लैब खत्म, सिस्टम हुआ सरल
काउंसिल ने 12% और 28% टैक्स स्लैब खत्म कर दिए हैं। अब अधिकतर उत्पाद या तो 5% या 18% स्लैब में होंगे।
इससे टैक्स सिस्टम न केवल सरल होगा, बल्कि मध्यम वर्ग के लिए कुछ वस्तुएं सस्ती भी हो सकती हैं।
कर संग्रह भी बढ़ेगा, स्वास्थ्य पर असर भी
सरकार के इस कदम से जहां टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी होगी, वहीं हानिकारक उत्पादों की खपत पर नियंत्रण भी संभव है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं की जेब पर इसका सीधा असर पड़ेगा और उन्हें महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।










