Tamil Nadu Politics : तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर सामने आया है। अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) के प्रमुख टीटीवी दिनाकरन (TTV Dhinakaran) ने बुधवार को भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से बाहर निकलने की औपचारिक घोषणा कर दी। दिनाकरन की पार्टी, AMMK, NDA से अलग होने वाली दूसरी प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी बन गई है। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम भी अपने दल को गठबंधन से अलग कर चुके हैं।

गठबंधन में दरार: दिनाकरन ने क्यों छोड़ा NDA?
दिनाकरन ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा,“यह आंदोलन कुछ लोगों के विश्वासघात के खिलाफ शुरू हुआ था। हमें लगा था कि वे सुधरेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”उनका सीधा निशाना AIADMK और खासकर इसके नेता ई. पलानीस्वामी (EPS) पर था, जिन पर उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने AMMK को गठबंधन में शामिल करने का विरोध किया। दिनाकरन ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की उम्मीद जताई थी, लेकिन उन्हें कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।

AIADMK और भाजपा के रिश्ते का असर
बता दें कि AIADMK और भाजपा का गठबंधन 2023 में टूट गया था, लेकिन अप्रैल 2025 में दोनों पार्टियों ने फिर हाथ मिलाया। इस नए समीकरण में AMMK को जगह नहीं दी गई, जिससे दिनाकरन नाराज़ थे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने किसी का इंतजार नहीं किया, न ही किसी के दबाव में कोई निर्णय लिया।
तमिलनाडु NDA में फूट की आहट
AMMK के NDA से बाहर होने के बाद तमिलनाडु में भाजपा गठबंधन की स्थिति डांवाडोल होती दिख रही है: O. पन्नीरसेल्वम पहले ही गठबंधन छोड़ चुके हैं। PMK में संगठनात्मक नेता एस. रामदास और नेता अंबुमणि रामदास के बीच मतभेद गहराए हैं।DMDK की स्थिति भी अस्पष्ट है। नाम तमिलर काची (NTK) और टीवीके (TVK) पहले ही एलान कर चुके हैं कि वे चुनाव में स्वतंत्र रूप से उतरेंगे।
2026 चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
2026 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह की राजनीतिक उठापटक से राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा हो गई है। दिनाकरन ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी दिसंबर में नए गठबंधन या स्वतंत्र चुनावी रणनीति पर निर्णय लेगी। उन्होंने कहा,“हम अम्मा के सच्चे कार्यकर्ताओं को एकजुट देखना चाहते हैं। जो लोग जनता को धोखा दे रहे हैं, उनके साथ खड़ा रहना संभव नहीं।”

NDA को तमिलनाडु में झटका, दिनाकरन की नई रणनीति पर नज़र
TTV दिनाकरन का NDA से बाहर निकलना केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत है। भाजपा के लिए यह एक बड़ा झटका है, खासकर जब वह राज्य में अपने आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि AMMK आगे किसके साथ जाती है, और क्या दिनाकरन एक नई क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभरने में कामयाब होते हैं।
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