Gujarat News: गुजरात के पालिताणा स्थित सरकारी अस्पताल में भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर में 2.55 लाख लीटर क्षमता वाली भूमिगत पानी की टंकी का निर्माण किए बिना ही करीब 50.43 लाख रुपये का बिल मंजूरी के लिए गांधीनगर भेज दिया गया। मामले का खुलासा स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया के औचक निरीक्षण के दौरान हुआ। निरीक्षण में जब मौके पर प्रस्तावित पानी की टंकी नहीं मिली, तो पूरे प्रकरण की जांच शुरू कराई गई।
स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण से खुली पूरी पोल
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पालिताणा अस्पताल में 2,55,000 लीटर क्षमता की अंडरग्राउंड पानी की टंकी बनाने का वर्क ऑर्डर सूरत की धर्मनंदन कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था। कंपनी की ओर से अधिकारियों के समक्ष ऐसे दस्तावेज और तस्वीरें पेश की गईं, जिनमें निर्माण कार्य पूरा होने का दावा किया गया था। कागजों में काम पूरा दिखाए जाने के बाद भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया भी आगे बढ़ा दी गई।
बिना मौके पर पहुंचे भेज दिया गया लाखों का बिल
मामले में सबसे गंभीर सवाल प्रोजेक्ट्स इंप्लीमेंटेशन यूनिट यानी PIU के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे हैं। आरोप है कि संबंधित इंजीनियरों ने निर्माण स्थल का भौतिक सत्यापन किए बिना ही दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके बाद 50.43 लाख रुपये का बिल गांधीनगर स्थित मुख्यालय में मंजूरी के लिए भेज दिया गया। यानी जिस निर्माण कार्य का मौके पर कोई अस्तित्व नहीं था, उसे कागजों में पूरा बताया गया।
अस्पताल में टंकी थी ही नहीं
स्वास्थ्य मंत्री के औचक निरीक्षण के दौरान जब अस्पताल परिसर में प्रस्तावित टंकी के बारे में जानकारी ली गई, तो अधिकारी भी हैरान रह गए। मौके पर न तो 2.55 लाख लीटर क्षमता वाली भूमिगत पानी की टंकी मिली और न ही अस्पताल प्रशासन एवं डॉक्टरों को इसके निर्माण की कोई जानकारी थी। इसके बाद अधिकारियों ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच शुरू की।
जांच में दस्तावेजों की गड़बड़ी सामने आई
विभागीय जांच के दौरान निर्माण कार्य और उससे संबंधित दस्तावेजों में कथित गड़बड़ियों की पुष्टि हुई। जांच में सामने आए तथ्यों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 18 अगस्त 2026 को कार्रवाई के आदेश जारी किए। विभाग ने स्पष्ट किया कि सरकारी परियोजना में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करना और बिना सत्यापन के बिल आगे भेजना गंभीर अनियमितता है। इसके बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई।
दो वरिष्ठ इंजीनियरों पर हुई बड़ी कार्रवाई
PIU भावनगर ग्रामीण कार्यालय में संविदा पर कार्यरत नायब एक्सिक्यूटिव इंजीनियर सिविल मेहुल एस. दवे को तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त कर दिया गया। वहीं, PIU सुरेंद्रनगर में तैनात नायब एक्सिक्यूटिव इंजीनियर सिविल एन.वी. कालिया को भी ड्यूटी से हटा दिया गया। उन्हें उनकी मूल आउटसोर्सिंग एजेंसी को वापस भेजने का आदेश जारी किया गया है। विभागीय कार्रवाई के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
निर्माण कंपनी के खिलाफ FIR की तैयारी
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए निर्माण कंपनी धर्मनंदन कंस्ट्रक्शन के साथ-साथ मेहुल दवे और एन.वी. कालिया के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा कथित तौर पर फर्जी बिल और दस्तावेज पेश करने वाली निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। विभाग अब मामले में जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सरकारी पैसे की बर्बादी पर मंत्री ने जताई सख्ती
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पतालों के बुनियादी ढांचे के लिए आवंटित सार्वजनिक धन में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता जांच को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद सरकारी परियोजनाओं में कागजी खानापूर्ति करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अस्पतालों में निर्माण कार्यों की निगरानी बढ़ी
पालिताणा मामले के सामने आने के बाद गुजरात के सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी PHC और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों यानी CHC में चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग अब ऐसे प्रोजेक्ट्स का मौके पर जाकर सत्यापन करने पर जोर दे रहा है। मंत्री ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे, ताकि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके।
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