Gut Brain Connection: क्या सच में Gut ही Brain है? डॉक्टर ने बताया पेट-दिमाग का गहरा कनेक्शन

Gut Brain Connection:  अक्सर कहा जाता है कि अगर पेट ठीक है तो शरीर भी स्वस्थ रहता है। लेकिन क्या आंत यानी Gut का सीधा संबंध हमारे दिमाग से भी होता है? अभिनेता और सांसद रवि किशन के ‘Gut ही Brain है’ वाले बयान के बाद यह सवाल चर्चा में आया है। मेडिकल साइंस के मुताबिक, आंत और दिमाग एक ही अंग नहीं हैं, लेकिन दोनों के बीच बेहद मजबूत संवाद जरूर होता है। फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. महेंद्र सिंह राजपूत के अनुसार, Gut और Brain के बीच का संबंध शरीर की सेहत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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Gut और Brain के बीच होता है लगातार संवाद

रवि किशन के बयान को अगर वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो आंत को दिमाग कहना सही नहीं होगा। दोनों शरीर के अलग-अलग अंग हैं, लेकिन इनके बीच लगातार सूचनाओं का आदान-प्रदान होता रहता है। इस कनेक्शन को मेडिकल साइंस में Gut-Brain Axis कहा जाता है। इसमें नसें, हार्मोन, इम्यून सिस्टम और आंत में मौजूद माइक्रोब्स मिलकर काम करते हैं। यही कारण है कि पेट से जुड़ी कुछ समस्याओं का प्रभाव मूड, तनाव और मानसिक स्थिति पर भी दिखाई दे सकता है।

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Vagus Nerve निभाती है अहम भूमिका

Gut-Brain Axis में Vagus Nerve की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। यह नस दिमाग और आंत के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में मदद करती है। इसके अलावा शरीर में बनने वाले विभिन्न हार्मोन और इम्यून सिस्टम से मिलने वाले संकेत भी इस संचार प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। इसलिए जब पाचन तंत्र में किसी तरह की गड़बड़ी होती है तो उसका प्रभाव केवल पेट तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि शरीर की दूसरी प्रक्रियाओं पर भी पड़ सकता है।

Gut Microbiome क्या है और क्यों जरूरी है?

हमारी आंत में अरबों सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से Gut Microbiome कहा जाता है। इनमें कई प्रकार के बैक्टीरिया शामिल होते हैं, जो शरीर के लिए अलग-अलग महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, Gut Microbiome से बनने वाले कुछ पदार्थ सूजन को नियंत्रित करने, आंत की अंदरूनी परत को स्वस्थ रखने और दिमाग तक संकेत पहुंचाने में भूमिका निभा सकते हैं। यदि आंत में मौजूद सूक्ष्मजीवों का संतुलन बिगड़ जाए तो शरीर की कई प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।

क्या खराब Gut Health से बढ़ सकता है तनाव?

वैज्ञानिक शोधों में आंत और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंध को लेकर लगातार अध्ययन किया जा रहा है। लंबे समय तक रहने वाली पाचन संबंधी समस्याओं और Gut Microbiome में होने वाले बदलावों का संबंध चिंता और तनाव जैसी स्थितियों से देखा गया है। हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि हर मानसिक स्वास्थ्य समस्या की वजह खराब Gut Health ही होती है। मानसिक स्वास्थ्य पर जीवनशैली, वातावरण और कई अन्य जैविक एवं सामाजिक कारकों का प्रभाव पड़ सकता है।

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सोशल मीडिया के दावों से रहें सावधान

आज सोशल मीडिया पर Gut Health को लेकर कई तरह के दावे तेजी से वायरल होते हैं। किसी खास सुपरफूड, ड्रिंक या प्रोबायोटिक को लेने से आंत और दिमाग पूरी तरह स्वस्थ होने जैसे दावों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, Gut Health सुधारने के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ या सप्लीमेंट पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित खान-पान और स्वस्थ दिनचर्या अपनाना अधिक महत्वपूर्ण है।

फाइबर और Fermented Foods को डाइट में करें शामिल

Gut को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज इसके अच्छे स्रोत माने जाते हैं। इसके अलावा दही जैसे Fermented Foods को भी संतुलित डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और पर्याप्त पानी पीना भी स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

बिना जरूरत Antibiotics लेने से बचें

विशेषज्ञों के अनुसार, बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक्स लेने से आंत के माइक्रोबायोम का संतुलन प्रभावित हो सकता है। साथ ही अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड का सेवन कम करना भी बेहतर माना जाता है। इन छोटी-छोटी आदतों से लंबे समय में पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

Gut Health का असर पूरे शरीर पर पड़ता है

मेडिकल साइंस में अब आंत को केवल भोजन पचाने वाले अंग के रूप में नहीं देखा जाता। इसका संबंध इम्यून सिस्टम, मेटाबॉलिज्म और Gut-Brain communication जैसी कई प्रक्रियाओं से है। इसलिए रवि किशन के बयान को शाब्दिक रूप से देखें तो ‘Gut ही Brain है’ कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि आंत और दिमाग के बीच गहरा संबंध मौजूद है। स्वस्थ आंत शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

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