Gut Health Diabetes
Gut Health Diabetes: चिकित्सा विज्ञान में हमारी आंत (Gut) को केवल भोजन पचाने वाला अंग नहीं, बल्कि शरीर का “दूसरा दिमाग” माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आंतों की सेहत हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य की नींव है। यह न केवल हमारे पाचन तंत्र को नियंत्रित करती है, बल्कि हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी), मानसिक स्वास्थ्य और मूड को भी गहराई से प्रभावित करती है। एम्स (AIIMS), हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षित गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने हाल ही में साझा किया कि आंतों में रहने वाले खरबों बैक्टीरिया हमारे शरीर के सिग्नलिंग सिस्टम का हिस्सा हैं। जब यह सिस्टम बिगड़ता है, तो शरीर चेतावनी संकेत देना शुरू कर देता है जिन्हें अक्सर हम सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
डॉ. सेठी के अनुसार, खराब गट हेल्थ के लक्षण केवल पेट दर्द या गैस तक सीमित नहीं हैं। यदि आपको लगातार थकान महसूस होती है, त्वचा पर अचानक मुँहासे या चकत्ते (Rashes) दिखने लगते हैं, या आपके स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ गया है, तो यह आपकी आंतों में असंतुलन का संकेत हो सकता है। आंतों की परत (Gut Lining) के कमजोर होने से टॉक्सिन्स रक्त प्रवाह में मिल सकते हैं, जिससे शरीर में सूजन (Inflammation) पैदा होती है। यह स्थिति आगे चलकर ऑटोइम्यून बीमारियों का कारण बन सकती है। इसलिए, पेट के भारीपन, कब्ज या दस्त जैसे शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेना अनिवार्य है।
आमतौर पर माना जाता है कि बढ़ा हुआ ब्लड शुगर लेवल ही डायबिटीज की पहली पहचान है, लेकिन डॉ. सेठी ने इस मिथक को तोड़ा है। उन्होंने बताया कि ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ (IR) वह पहली अवस्था है जो टाइप-2 डायबिटीज की ओर ले जाती है। दिलचस्प बात यह है कि इसका पहला संकेत लैब टेस्ट की रिपोर्ट में नहीं, बल्कि आपके पेट पर दिखता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस का अर्थ है कि शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन के प्रति सही प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं। नतीजतन, अग्न्याशय (Pancreas) को अधिक इंसुलिन बनाना पड़ता है, जिससे शरीर में फैट स्टोरेज बढ़ जाता है।
जब शरीर इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में होता है, तो ग्लूकोज ऊर्जा में बदलने के बजाय फैट के रूप में जमा होने लगता है। इसका सबसे स्पष्ट संकेत ‘विसेरल फैट’ यानी पेट के आस-पास की जिद्दी चर्बी है। इसके अलावा, गर्दन के पीछे या बगल (Armpits) की त्वचा का काला पड़ना (Acanthosis Nigricans) भी एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। लगातार थकान महसूस होना, खासकर खाना खाने के तुरंत बाद बहुत नींद आना, यह दर्शाता है कि आपका शरीर शुगर को कुशलता से प्रोसेस नहीं कर पा रहा है। अगर इन लक्षणों को सही समय पर पहचान लिया जाए, तो डायबिटीज और हृदय रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अच्छी खबर यह है कि गट हेल्थ और इंसुलिन रेजिस्टेंस दोनों को शुरुआती चरणों में केवल जीवनशैली में सुधार करके ठीक किया जा सकता है। डॉ. सेठी के अनुसार, प्रोबायोटिक्स और प्रीबायोटिक युक्त भोजन (जैसे दही, किम्ची, फाइबर युक्त सब्जियां) का सेवन आंतों के माइक्रोबायोम को संतुलित करता है। नियमित व्यायाम, विशेष रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, मांसपेशियों की इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाती है। इसके अलावा, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन इंसुलिन के स्तर को सामान्य रखने में मदद करते हैं। याद रखें, आपका पेट आपके स्वास्थ्य का दर्पण है; इसके संकेतों को सुनना ही दीर्घायु होने की कुंजी है।
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